New Education Policy, National Education Policy 2020
How to Become the Best Teacher
Outstanding in Your Field: What It Takes to Be a Great Teacher
The Heart of Teaching and the Qualities of a Great Teacher
What Makes A Good Student?
What should good education be like?
What Does It Really Mean To Get A Best
Child's Education and Schooling
शिक्षा व्यक्ति के जीवन का आधार है| शिक्षा राष्ट्र की रीढ़ है| शिक्षा समाज की रूह है| शिक्षा अमृत का सरोवर है जिसकी फुहारों से शिक्षार्थी सराबोर हो जाये तो जीवन की बुनियाद खड़ी हो जाती है| बुनियाद मजबूत हो तो इमारत बुलंद होती है| शिक्षक पाठशाला की बगिया में फलते फूलते विद्यार्थियों का माली है| वो उनके लिए ज्ञान के भंडार से ऐसे खाद बीज को छांटता है जो उस बगिया में आकार ले रहे बाल पौधे को नरिश करे, उसे पुष्पित और पल्लवित करे|
शिक्षा बच्चे को रट्टू टूटा बनाने का रास्ता नहीं, शिक्षा बच्चे के मानसिक डेवलपमेंट के साथ केरेक्टर, डिसिप्लिन विकसित करने का नाम है शिक्षा बच्चे में एक ऐसी प्रतिभा का विकास करती है जो उसे सही गलत में फर्क करने की केपेसिटी देती है| शिक्षा मशीन बनाने की व्यवस्था नहीं| शिक्षा छात्र के व्यक्तित्व को विकसित करने, उसे देश काल परिस्थिति के मुताबिक़ ढालने, आने वाली चुनौतियों से निपटना सिखाने का जरिया है| यदि ये तीन मकसद शिक्षा में छिपे नहीं हैं तो वो एजुकेशन अपने उद्देश्य को पूरा नहीं करता वो अधुरा है|
शिक्षा व्यवस्था मानव को सिर्फ पैसा कमाने की मशीन बनाती है| वो विद्यार्थी को केवल आज की परिस्थिति में ढलना सिखाती है| वो आज के चलन और कल्चर पर ही केन्द्रित है| सरकार ने कोशिश की इस जड़ता को चेतना में बदलने की| सिर्फ सरकारी कोशिशें ही काफी नहीं| टीचर्स की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है| टीचर सिर्फ एक प्रोफेशनल नहीं जिसका काम नौकरी बजाकर अपना घर चलाना हो| टीचर जब तक दूरगामी सोच का नही होगा, स्वाध्यायी नहीं होगा, भूत वर्तमान और भविष्य के प्रति जागरूक नहीं होगा| एक पूर्ण मानव के निर्माण में जरा सी भी भूमिका नहीं निभा सकेगा|
आज "शिक्षा" व्यवस्था ही नहीं "शिक्षक" व्यवस्था भी बदलने की ज़रूरत है| टीचर्स को ये भान ही नहीं है कि वो किस भूमिका के लिए चयनित हैं| उन पर कितनी महान ज़िम्मेदारी है| मानव का सही दिशा निर्देशन करने के लिए शिक्षक का खुले विचारों का होना ज़रूरी है| भारत के दूरदर्शी मनीषी और महर्षियों को पढ़ने सुनने समझने की किस शिक्षक को जिज्ञासा है| भारत का दर्शन क्या है? शिक्षा के मूल में कौन से तत्व छिपे हैं? क्या हमारे शिक्षक ये जानते हैं?
भारत का षड्दर्शन मानव का सही निर्देशन करने में केपेबल हैं| लेकिन उसे शिक्षक ही नही समझेगा तो स्टूडेंट की बात ही छोड़ दें| ज़रूरी नहीं कि सब कुछ पढ़ा जाए, बस मूल भावना को समझ लें| सम्पूर्ण व्यक्तित्व के निर्माण के सूत्रों को जान लें, तो भविष्य की पीढ़ी को अच्छे ढंग से तैयार किया जा सकता है| कोई फर्क नहीं कि आप गणित के टीचर हैं आप विज्ञान के शिक्षा देते छात्रों को जीवन की गहरी शिक्षा दे सकते हैं|
भारतीय दर्शन में आनंद और सुख "उत्तेजना" नहीं गहरा आत्मिक अनुभव छिपा है| क्या छात्रों को कभी ये बताया जा सकेगा कि शरीर के सुख से परे भी आनंद का एक विज्ञान है| जानकारियों को रटा देने से बच्चे भविष्य के ज़िम्मेदार नागरिक नही बन सकते| सतह पर खड़े होकर दी जाने वाली शिक्षा सिर्फ रोबोटिक प्रोग्रामिंग हैं| भविष्य में जानकारियों से जुड़े सारे काम गेजेट्स कर लेंगे| मानव को मशीनों से कोम्पीटीशन करना होगा| मशीनों से आगे सिर्फ चेतना ही है| मशीनों में चेतना ही तो नहीं है| यदि मानव इसी चेतना को भुला बैठा और जड़ हो गया तो उसका स्थान भी मशीन ले लेगी| मनुष्य का "स्व" उसकी आत्मा और चेतना ही उसे जंतुओं और मशीनों से अलग करती रहेगी| लेकिन उसे अपनी चेतना को विकसित करते रहना होगा| इसका विज्ञान सिर्फ भारतीय योग दर्शन के पास है|
आज मनुष्य रिश्ते, नाते, परवरिश, जिम्मेदारियों और मनोरंजन के बीच झूल रहा है| जन्म लेना, फिर देना, फिर इसे चलाना| टेक्नोलोजी के विकास के साथ उसका ये काम आधा भी नहीं बचेगा| तब फिर वो क्या करेगा? अभी तो उलझा है फिर पागल हो जायेगा| आज भी मानसिक विकार ही सबसे बड़ी समस्या है| जीवन में बहुत बदलाव हो चुके और बहुत होने हैं| अब शिक्षा व्यवस्था से मस्तिष्क के साथ आत्मा की शक्ति का विकास भी होना चाहिए| शिक्षा, ज्ञान चरित्र और संस्कृति का विकास भी करे| शिक्षा छात्र के अंदर बैठी हुयी अन्तरंग शक्तियों का भी विकास करे, उसका मस्तिष्क अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग कर सके| शिक्षा के ज़रिये उसके स्वास्थ्य का विकास हो| भावनात्मक स्थिरता मिले| आध्यात्मिक चेतना जागृत हो|
शिक्षा ऐसी हो जो बालक के अन्दर मौजूद सर्वश्रेष्ठ का उदघाटन करे | उसकी मौलिक विशेषता का परिष्कार करे| इसके इनबोर्न टेलेंट को पहचान कर उसे दिशा और गति दे| उसके जीवन को सम्पूर्णता और समग्रता दे| इन सबके लिए शिक्षा के साथ शिक्षक और शिक्षक के शिक्षार्थी में भी बदलाव ज़रूरी है| जब तक देने वाला मास्टर से उपर उठकर गुरु पद नहीं ग्रहण करता, और लेने वाला छात्र "शिष्य" नही बनता सरकारों के प्रयास निर्थक ही रहेंगे|
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