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गुरु सियाग सिद्ध योग परिचय


 गुरु सियाग सिद्ध योग परिचय

गुरु सियाग सिद्ध योग मंत्र जाप और ध्यान पर आधारित आध्यात्मिक साधना है। सिद्ध योग एक ऐसा विज्ञान है जो आज तक प्रकट नहीं हुआ। सिद्धयोग में अभी तक के सारे योग (भक्ति योग, लय योग, हठ योग, कर्म योग, राज योग, क्रिया योग, ज्ञान योग, भाव योग, आदि) सम्मिलित होते हुए भी यह साधना अत्यंत सरल एवं सहज है जो किसी भी धर्म, आयु का व्यक्ति बड़ी सरलता के साथ बिना किसी परहेज़ के कर सकता है। यह योग नाथ मत के आई पन्थी योगियों (गुरु शिष्य परंपरा) की देन है।


क्या इसमें किसी धोखे की संभावना है?

नहीं, गुरूदेव भौतिक शरीर त्याग करके ब्रह्मलीन हो चुके है इसलिए धोखे की संभावना ही नहीं है। आपको घर बैठे केवल मंत्र जप एवं ध्यान करना है कहीं भी जाने या किसी से मिलने की आवश्यकता नहीं है। फिर धोखाधड़ी का तो सवाल ही नहीं। 


गुरु देव राम लाल जी सियाग कौन हैं?


समर्थ सद्गुरु देव श्री राम लाल जी सियाग एक प्रवर्ती मार्गी संत थे। निर्गुण निराकार एवं सगुण साकार दोनों तत्वों की सिद्धि होने के कारण समस्त संसार में केवल इनकी तस्वीर का ध्यान करने से लाखों लोगों के समस्त शारीरिक रोग ठीक हो रहे है। गुरूदेव अब ब्रह्मलीन हो चुके है, पलाना (बीकानेर) में इनका समाधी स्थल है। इसके गुरु का नाम 1008 बाबा श्री गंगाई नाथ जी महायोगी है, जिनका समाधी स्थल जामसर (बीकानेर) में स्थित है।


इस साधना में क्या करना होता हैं?


सिद्धयोग में आपको केवल संजीवनी मन्त्र का मानसिक जप और दोनों समय 15-15 मिनट (खाली पेट) गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग का ध्यान करना होता है। यह पूर्णतः निःशुल्क है एवं मात्र घर बैठे ही मोबाइल से गुरुदेव की दिव्य वाणी में संजीवनी मंत्र को सुनना है। इससे ही गुरु दीक्षा हो जाती है। ऐसा भी संसार में पहली बार नाथ गुरुओं के आदेश से संभव हुआ है। इससे पहले गुरु केवल पात्र शिष्य को ही गुरु दीक्षा (कान में मंत्र सुना कर) देते थे। 


क्या इसके लिए हाथ में कोई माला पकड़ने या किसी प्रकार की पूजा-अर्चना की आवश्यकता है?

नहीं, गुरु सियाग सिद्ध योग में केवल मानसिक जप करना होता है, अतः किसी प्रकार की माला की आवश्यकता नहीं होती है। गुरुदेव ने कहा है कि उनके गुरु बाबा श्री गंगाई नाथ जी को उन्होंने एक अगरबत्ती भी नहीं लगाई एवं गुरुदेव ने भी अपने शिष्यों से कभी कुछ नहीं मांगा। इसमे पूजा की भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि मानसिक जप सभी पूजा, पाठ, दान, दक्षिणा, तीर्थयात्रा, अन्य कर्म काण्ड, आदि को सम्मिलित कर देता है। 


मंत्र कैसे कार्य करता है?

गुरुदेव ने कहा है कि जिस प्रकार राई के समान छोटे से बीज़ से बरगद के विशालकाय पेड़ का निर्माण होता है, उसी प्रकार गुरुदेव के दिये छोटे से बीज मंत्र (राधा कृष्ण) से साधकों के त्रिविध ताप (शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक) शांत होते है।


कैसे मान लें कि मंत्र इतना शक्तिशाली है?


प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। गुरु अगर समर्थ होगा तो स्वयं ही पता चल जायेगा। संसार में पहली बार किसी गुरु का ध्यान करने से अपने आप (Automatic) यौगिक क्रियाएं होती है एवं सभी रोग ठीक हो रहे है। किसी के कहने पर आप विश्वास ना करे, स्वयं ध्यान करके देख लें कि यह बात सत्य है या नहीं।


बिना किसी परहेज़....अत्यंत सरल....पूर्णतः नि: शुल्क