Type Here to Get Search Results !

संजीवनी मंत्र : सिद्ध योग “ गुरु सियाग मंत्र क्या है? ये कैंसे काम करता है?

 संजीवनी मंत्र : सिद्ध योग “ गुरु सियाग मंत्र क्या है? ये कैंसे काम करता है? 




कलियुग में केवल , सद्गुरु द्वारा दिया हुआ हरि नाम ( संजीवनी मंत्र ) का जप ही सारे कष्टों से छुटकारा दिलाता है । ‘ अब कलयुग में देखिए ! हर युग में हमारे दार्शनिक ग्रंथों के अनुसार आराधना का तरीका तय होता है । सतयुग का अलग था , त्रेता का अलग था , द्वापर का अलग था । मनुष्य की शक्ति और सामर्थ्य को ध्यान में रखते हुए , हमारे धर्म में आराधना तय की गई है । अब कलयुग में , उस तरीके से ( आराधना ) करना संभव नहीं है । इसलिए , इस युग में केवल हरि नाम का जप ही सारे कष्टों से छुटकारा दिलाता है । ईश्वर के नाम का जप | गीता में भगवान कृष्ण ने नाम । जप को सबसे उत्तम यज्ञ की संज्ञा दी है । ” दसवें अध्याय में अपने स्वरूपों का वर्णन किया है । भगवान ने पच्चीस वें श्लोक में कहा है कि ” यज्ञों में , मैं जप यज्ञ हूँ । नाम जप सबसे उत्तम यज्ञ है । ” महाभारत कहती है कि यह एक ऐसा यज्ञ है जिससे कोई हिंसा नहीं होती है । महाभारत काल में हिंसा बहुत हुई , इसलिए वह लोग हिंसा से बहुत डरते थे । नाम जप से कोई हिंसा नहीं होती । कर्म काण्डी यज्ञ करोगे , आग में घी लकड़ी वगैरह जलाओगे तो कमोबेश थोड़े बहुत जीव जलेंगे, मगर नाम जप में कोई हिंसा नहीं होती । मनु ने , मनु स्मृति में कहा है कि ‘ जप यज्ञ ‘ द्वारा , कर्म काण्डी यज्ञों से हजार गुणा ज्यादा फायदा होता है । मैं तो आपको एक नाम बताऊँगा , वह आपको जपना है । वैसे मैं, क्योंकि एक कृष्ण उपासक हूँ , इसलिए राधा और कृष्ण के मंत्र की दीक्षा देता हूँ । भगवान् कृष्ण पूर्णावतार थे और उस कृष्ण के नाम का ही चमत्कार है कि यह सब परिवर्तन हो रहा है । मेरा कोई पंथ नहीं, नया मत नहीं, वही वैदिक दर्शन को मूर्त रूप दिया जा रहा है । ” -समर्थ सदगुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग


दैहिक, दैविक, भौतिक तापा 

रामराज ना काहू व्यापा,

मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा। पंचम भजन सो बेद प्रकासा॥

छठ दम सील बिरति बहु करमा। निरत निरंतर सज्जन धरमा॥


मंत्र जप,जब अजपा में बदल जाता,तो 24 घंटे सांसो में चलने लगता है, मनोमय कोष तक ही साधक इन उपलब्धियों को पा लेता है|


जेसे-जैसे भगवान के नाम रस में प्रीति बढ़ेगी.. चिंता, दुःख मिटते जायेंगे , तो सुमिरन ध्यान मे आनंद आने लगता है..प्रीति  का रस प्रकट होता जायेगा, मन की चंचलता मिटने लगेगी, मंत्र जाप से आध्यात्मिक तरंगे उत्पन्न होती है..इससे चित्त में आनंद और शांति  व्याप हो जाती है..चित्त की चंचलता मिट जाती हैं, फालतू विचारों का  शमन होने से समाधान मिलता है।


परमात्मा  की प्रेरणा  होने लगेगी, इष्ट देव सपने में आकर दर्शन देंगे या और किसी प्रकार से आप को मार्गदर्शन मिलेगा.. …बुध्दी विवेकवती हो जाती हैं, जिससे अच्छे- बुरे को समझने की सूझ बुझ मिलती है, जप करने से नीरसता दूर होगी और आस्था  बढ़ेगी, बिमारियो का शमन होगा और रोग प्रतिकार की शक्ति बढती है|


 सुख और दुःख में समभाव स्थापित  होगा 

 गुरु मन्त्र के जप से सभी जन्मो के पाप नाश होंगे,

 परमात्मा के एकत्व का दैवीय ज्ञान प्रकट होता है,दिव्य प्रेरणा प्रकट होने लगती है|

आपका आत्मविश्वास बढेगा, चिंता –निश्चिन्तता में बदलती है, नशे अपने आप छूट जाते हैं,

मन्त्र जाप से भय – निर्भयता में ,  घृणा – प्रेम में  और काम राम में  बदलने लगता है,

जैसे अपशब्द से द्वेष , घृणा  और अशांति पैदा होती है , वैसे मंत्र से आनंद, माधुर्य , उत्साह और शांति  प्रकट होती है, तो शोक नाश होता है,

समता बढ़ती है,तो दुःख-सुख, लाभ-हानि  ये आने जाने वाली है,ऐसा अनुभव होता है और व्यक्ति वैभव, यश-अपयश के, प्रलोभन में सिकुड़ता नहीं,नाही घबराता हैं,

संसारी प्रेम शोषित करता है, बंधन में बाधता है,भगवान से प्रेम पोषित करता है,जीते जी जीवनमुक्त करता हैं,मंत्र जाप से धारणा  शक्ति बढ़ती है,सूझ बुझ बढ़ती है,जो संसारी  वासना को क्षीण कर देगी,आयुष्य और आरोग्य मिलता है|

जीवन सहज हो जायेगा,कोई वाहवाही करेगा तो भी गर्व से फुलोगे नहीं और कोई निंदा करेगा तो भी पिचकोगे नहीं, मंत्र नाम जपने  वाला सहज और सरल जीवन जीने का अधिकारी हो जाता है , जो सहज है जो सरल है वही सोहम है,मंत्र जप से आनंद और प्रसन्नता स्वभाव में आ जाती है|

क्षमा शक्ति बढ़ती है,  क्रोध कम हो जाता है, शौर्य शक्ति बढती है, मंत्र जप से वीर्य और तेज बढ़ता है,धैर्य बडता हैं,बल और विजय प्राप्त होती है|

मन्त्र जप से इतनी ऊँची अवस्था में  आ जाएगी,कि परमात्मा का वैभव प्रकट होगा..बाहर  का वैभव कितना भी मिल गया तो  छूटेगा, लेकिन परमात्मा  वैभव कभी नहीं छूटने वाला वैभव है|

मन्त्र से तीव्र शक्तियां  विकसित होती है,शरीर से पवित्र किरण बाहर निकलेगी|

मन्त्र जाप से इतनी शक्तियां  विकसित होती है की आगे घटित होने वाली घटनाओं की आहट पहले ही  पता चल जाती है,व्याधी नाशिनी शक्ति जागृत होती है..खुद के रोग व्याधि दूर करते ही है ,लेकिन दूसरों पर भी नजर  डालेंगे या मन्त्र जाप से पानी देंगे तो उनकी व्याधियां  मिटेंगी,  दुःख- हारी  शक्ति का विकास होगा..

पापनाशिनी शक्ति का विकास होगा l

आप के पास आने वाले लोगो को भी शांति  का अनुभव होगा, शुभ कर्म में पूर्णता आती है|

गुरु मन्त्र का जप करने से सारे  वेद पाठन करने का और सारे तीर्थों का फल मिलता है|

गुरु मन्त्र को दृढ़ विश्वास से जपने से वेद का ज्ञान प्रकशित होने लगता है, शास्त्र के अर्थ अपने आप प्रगट होने लगते है ,जो भी कार्य करते है,तो वह सफल होता है|

बुद्धि प्रखर होती है,मेधावी बनती है,आप प्रज्ञावान हो जाते हो,बड़े बड़े ज्ञानी भी इसलिए सुनते हैं,

सुषुप्त  शक्तियां  जागृत होने लगती है|

ब्रह्म के समान अधिकार की वृत्ति बनेगी ऐसी ईश्वर से एकाकारता होगी…भगवत आनंद दायिनी, आल्हादिनी शक्ति विकसित होती है|

मुक्ति प्रदायिनी शक्ति विकसित होती है..ज्ञान ,मुक्ति ,शांति, नित्य सुख और अमरत्व की  प्राप्ति होती है,साधक जीते जीवन मुक्त हो जाता है,यह सच्चिदानंद स्वरूप सद्गुरु द्वारा प्रदत्त मंत्र  का चमत्कार है और यही गुरुप्रसाद हैं।

वर्तमान में जीना,और भविष्य के लिये, रहस्यवादी साधना ही धर्म का मौलिक रूप है, स्वयम को जानना ही रहस्यवाद की प्रथम अवस्था है,....सभी प्रबुद्ध ,सूझवान और समझदार लोगो को आमंत्रण..सिद्धयोगा,एक कल्पतरु का पेड़ है,भावना के अनुसार क्रियाशील होता है,आओ इसका अभ्यास करें.....

....सिद्ध योग का अभ्यास किया नहीं जा सकता , यह अपने आप होता है, सिद्ध योग के अभ्यास का मतलब है, हमेशा, धैर्य , समभाव, कृतज्ञता, और आनंद के राज्य में रहना....


जय गुरुदेव जी