Type Here to Get Search Results !

सिद्धयोग : मनुष्य जाति में यह एक क्रियात्मक बदलाव है ।

 मनुष्य जाति में यह एक क्रियात्मक बदलाव है । अपनी शक्तियों को चेतन करके लाभ उठाना यह कोई जादू नहीं है । यह मानव में Due ( बाकी ) था । मानव जाति में यह विकास होना संभव है । Due था शुरू हो गया, कोई Abnormal ( असाधारण ) बात नहीं हो रही है|





(1) गुरु  जिस धरा पर अवतरित होते है वहाँ परमआनंद होता है वहां के सब तामसिक दोष समाप्त हो जाते हैं |

(2) जिस जगहगुरु  वास करते उस जगह देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं

(3) गुरुदेव को निहारने,गुरु  की फ़ोटो चित्र दर्शन करने से   मन मे घंटियां बजने लग जाती है आरती होती है तो समझो प्रणाम स्वीकार हो गया 

(4) जो व्यक्ति गुरु की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गुरु हर लेते हैं| 

(5) गुरु के चरणो मे स्वर्ग होता है जहां गुरुदेव विचरण करते है उस जगह वास करने से तामसिकता का दमन होता है| 

(6)गुरु में (लक्ष्मी-सरस्वती-दुर्गा) सभी शक्तियों का वास होता है|

(7)गुरु में सुर्य-चन्द्र-देवलोक, पूर्ण ब्रह्माण्ड का वास तेज़  होता है|

(8)गुरु मंत्र मे वो शक्ति है जो कुंडलिनी जागृत कर सकती है समस्त रोगों को दूर कर शिष्य का कल्याण होता है| 

(9)गुरु मे ब्रह्म चेतना का वास होता है किसी व्यक्ति को कुछ हो जाये तोगुरु  से प्रार्थना कर लेने से दोष दूर  हो जाते है|

(10) गुरु का रोजाना सुबह-शाम ध्यान करने से तीनों ताप भौतिक दैहिक मानसिक रोग दोष का नाश होता है|

(11)गुरु के मंत्र जाप से सभी देवी देवताओं को भोग लग जाता है|

(12)गुरु मंत्र हजारों  रोगों की दवा है इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं|

(13) जिस व्यक्ति का भाग्य सोया हुआ हो ,दुर्भाग्य से घिरा हो तोगुरु  कृपा से उस व्यक्ति का सोया हुआ भाग्य खुल जाता है| 

(14)गुरु की सेवा से चरणों मे समर्पण से इंसान भय मुक्त हो जाता है| 

(15)गुरु ही महान विद्वान धर्म रक्षक ईश्वर का रूप अवतार होते है| 

(16)गुरु की सेवा, मोक्ष के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लिये हैं |

(17)गुरु मंत्र सुमिरन से जन्म जन्मांतर के कर्म पाप कष्ट कट जाते है|

 (18) समर्थगुरु  विरला एक काल खंड में एक ही होते है|

(19)गुरु  अगर स्वप्न में भी वात्सल्य भरी निगाहों से जिसे भी देखते है उनके ऊपरगुरु  कृपा  हो जाती है

(20)गुरु  मंत्र का जाप करने से नौ ग्रह शांत रहते हैं, जो ध्यान के साथ करता है उनको शत्रु और अन्य दोषों भी से छुटकारा मिलता है|

(21)गुरु  एक चलता फिरता मंदिर है हमारे सनातन धर्म में तैंतीस कोटि देवी देवता है हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते परगुरु  के दर्शन हृदय कमल, आज्ञा चक्र  भृकुटि पर ध्यान लगाकर वहां सेगुरु  का ब्रह्म स्वरूप में सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते हैं 

(22) कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो तोगुरु  को  कहिये रुका हुआ काम बन जायेगा

(23) गुरु  सर्व सुखों के देने वाले हैं|