दुनिया में ऐसे अनेक ग्रुप सक्रिय हैं जो दूसरी दुनिया से मिलने वाले संदेशों को डीकोड करने का दावा करते हैं| ऐसा ही एक ग्रुप है PLEIADIANS मास्टर्स “प्लेडियन” मास्टर्स का दावा है कि ये समय धरती के लिए एक बड़े बदलाव का समय है| इस साल के अंत तक धरती बहुत अच्छे समय में प्रवेश कर रही है| ये वो समय होगा जब लोग अध्यात्म की तरफ तेजी से आगे बढ़ेंगे| पूरी मानव जाति इस समय का फ़ायदा लेकर खुद को हायर डायमेंशन में ले जा सकती है|

ये संदेश कैसे मिले? क्यों मिले और इनका भारत से क्या सम्बन्ध हैं?
दूसरी दुनिया मानव जाति की चेतना के विकास की शुरुआत से ही रूचि का विषय रही है| भारतीय दर्शन, अध्यात्म और ज्योतिष विज्ञान में अन्य ग्रहों के मानव जाति पर पड़ने वाले प्रभावों का महत्व समझा गया है| ज्योतिष विज्ञान में सौर मंडल से बाहर मौजूद नक्षत्रों का धरती और मनुष्यों पर प्रभाव को लेकर काफी कुछ बताया गया है| तारों के छोटे छोटे समूहों को २७ भागों में बांटा गया है|
Pleiades stars को ज्योतिष में कृतिका नक्षत्र कहा जाता है| अलग अलग सभ्यताओं में इस नक्षत्र पर मौजूद जीवन से ही प्रथ्वी पर जीवन और मानव के विकास में योगदान माना जाता रहा है| रात के आसमान में कृतिका नक्षत्र "सात तारा समूह" के रूप में दिखाई देता है जिन्हें Pleiades stars कहा जाता है।
Pleiades stars(कृतिका नक्षत्र) को एक पांचवे आयाम का गृह/ नक्षत्र समूह भी माना जाता है| कहा जाता है कि इसी जगह से “सूक्ष्म रूप” (एथरिक बॉडी फॉर्म, प्राण शरीर) में लेमुरिया नमक जगह पर आकर Pleiades stars के प्राणियों(Pleiadean's) ने जीवन की शुरुआत की|
लेमुरिया नमक द्वीप पर प्राण शरीर को धीरे धीरे स्थूल शरीर से जोड़ा गया| ये जगह भारतीय महासागर में थी| और यहाँ जीवन की शुरुआत हुयी| तमिल इतिहासकारों के अनुसार इस द्वीप का नाम 'कुमारी कंदम' था। 'कुमारी कंदम' आज के भारत के दक्षिण में स्थित हिन्द महासागर में एक खो चुकी तमिल सभ्यता की प्राचीनता को दर्शाता है। इसे 'कुमारी नाडू' के नाम से भी जाना जाता है।
जिस तरह वर्तमान में ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण पृथ्वी पर कई विनाशकारी बदलाव होने की आशंकाएं जताई जा रही हैं, उसी तरह प्राचीनकाल में एक बार ऐसा हो चुका है जिसके चलते लेमुरिया और मु नाम के 2 महाद्वीप ( 'कुमारी कंदम') जलमग्न हो चुके थे।
आज से लगभग 14,000 साल पहले जब 'कुमारी कंदम' जलमग्न हो गया तो लोग यहां से पलायन कर अफ्रीका, यूरोप, चीन सहित पूरे विश्व में फैल गए और कई नई सभ्यताओं को जन्म दिया। एल्फ्रेड रसेल एवं एर्नेस्ट हेकेल का मानना था कि मनुष्य की उत्पत्ति इन महाद्वीपों पर हुई थी।
Pleiadians ने न सिर्फ धरती पर जीवन की शुरुआत की बल्कि आज भी वे धरती को लेकर चिंतित रहते हैं| ये लोग आज भी अध्यात्मिक चेतना के ज़रिये उच्च स्तरीय मनुष्यों को संदेश भेजते हैं| ध्यान की गहरी अवस्था में ये सन्देश मिलते हैं| कुछ लोग इन्हें डीकोड भी कर लेते हैं|
Enlightened लोगों को ऐसे सन्देश मिलते हैं जिन्हें हम दैवीय सन्देश कहते हैं| भले ही कुछ लोग इसे प्लेडीयन्स के संदेश कहें| लेकिन सच्चाई ये है कि हर इन्सान के अंदर दुनिया की शुरुआत से लेकर अभी तक का डेटा एक्सेस करनी की क्षमता है यदि वो चेतना के उच्च शिखर पर पहुच जाए|

प्लेडियंस थ्योरी को मानने वाले कहते हैं कि जिस तरह सौर मंडल पर का मुखिया गृह सूर्य है| उसी तरह अनेक सौर मंडल से बने एक और बड़े घेरे का मुखिया केन्द्रीय सूर्य है| हमारा सौर मंडल उस महा-सूर्य के चक्कर काटता है| कुछ लोग इसे परम शिव कहते हैं जिससे सब कुछ पैदा हुआ| ये थ्योरी ऋग्वेद में भी आती हैं|
हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेकासीत ।
स दाधार पृथ्वीं ध्यामुतेमां कस्मै देवायहविषा विधेम ॥
ऋग्वेद ने कहा सबसे पहले ब्रम्ह ने इस "गोल्डन एग" .. हिरण्यगर्भ को पैदा किया उसी से सब उत्पन्न हुए वही सबका आधार है| हम सब शिवलिंग के रूप में उसी अंडाकार ज्योतिर्लिंग परम-शिव "हिरण्यगर्भ" की आराधना करते हैं|

Pleiadians मेसेज प्राप्त करने वालों ने बताया कि इस समय धरती इस महासूर्य से अधिक प्रकाश प्राप्त कर रही है| धरती पर ये बड़े परिवर्तन का युग है| और हम सब "संक्रमण" काल से गुजर रहे हैं इस साल के अंत तक ये "ट्रांजीशन" पीरियड खत्म हो जायेगा और हम नए युग में प्रवेश करेंगे| ये युग अध्यात्मिक जाग्रति का होगा|
ये सन्देश Enlightened Pleiadian beings का बताया जाता है| हालाकि भारत के उच्चस्तरीय संत व् अध्यात्म जागृत लोग भी यही महसूस करते हैं| दिख भी रहा है कि हम एक परिवर्तन के युग में हैं|
Enlightened Pleiadian beings के संदेशो के मुताबिक़ धरती पर हर ५००० साल में छोटा और २६००० साल में बड़ा परिवर्तन का युग आता है|

ये कहा जा रहा है कि ये युग प्रकाश का युग होगा| ये दौर Reawakening and consciousness यानि पुनर्जागरण और चेतना का काल होगा|
भले ही इस तरह की बातें पश्चिमी देशों से Pleiadian beings के नाम से आ रही हों लेकिन भारत लागातार ये बात कहता आ रहा है|
भारत ने हमेशा से विश्व बंधुत्व और शुद्धि, सुचिता, एकता, प्रेम, भाईचारे की बात की| आज दुनिया के कई लोग Pleiadian beings के संदेशों के बाद यही बात दोहरा रहे हैं|
हमारी संस्कृति हमेशा से मानती आई है कि उच्च स्तरीय पारलौकिक शक्तियों ने मानव जाति के विकास में हमेशा से योगदान दिया है| हम उन्ही शक्तियों का आवाहन करते हैं इसके लिए ही हम विभिन्न तरह के ज्योतिष उपाय, पूजा, कर्म, मंत्र, योग, ध्यान अदि का सहारा लेते हैं| ये सब दैविय शक्तियों की मदद से कांटेक्ट करने और हेल्प लेने विशेष प्रक्रियाएं हैं|
हम उन्हें Pleiadian beings कहें या देवी देवता| शब्द भाषा या अभिव्यक्ति अलग हो सकती है लेकिन इतना सच है कि हमारे आस पास मौजूद हर गृह, नक्षत्र व तारे का हम पर प्रभाव पड़ता है उनमे सूर्य सबसे अहम् है| और उस सूर्य से भी अहम है वो "परम-सूर्य" जो हम सबका आधार है| अच्छी बात है कि दुनिया आज उस सत्य को मान रही है जिसे हम सदियों से मानते आये हैं|

निश्चित ही युग परिवर्तित हो रहा है| कोरोना ने भी मानव जाति को बहुत से सबक दिए हैं| कलयुगी अमानवीयता की जगह मानववाद, मानव अधिकार समानता और तकनीकी विकास का दौर है| कुछ खलनायक बचे हैं| लेकिन प्रकृति उनके अरमान भी ठंडे करेगी|
हम सब प्रकृति व विश्व की महाशक्तियों के संदेशों को डीकोड कर पा रहे हैं| इन संदेशों का अर्थ यही है कि हम प्रेम को बढ़ाएं, प्रकृति से जुड़ें|
मानवमात्र को अब spiritually aware होगा परिवर्तन में छिपे संदेशों के साथ खुद को अलाइन करना होगा|
नये युग के साथ ही सूर्य धरती के साथ और ज्यादा अलाइन होगा| मानव को उसकी high frequency के साथ तालमेल बनाने के लिए खुदको तैयार करना होगा|
मनुष्य अगले कुछ चेतना के विकास और जागरूकता के साथ बढेगा तो प्रकृति उसे बहुत अच्छे रिजल्ट्स देने वाली है|
हम प्रकाश की ओर बढ़ रहे हैं|

हम जानते है कि हम सब उस परमात्मा के ही अंश हैं| परमात्मा ने ही सृष्टि रची है| उसी ने गृह नक्षत्र तारे और उन पर जीवन का स्रजन किया है |दूसरी दुनिया भी उसी ने बनायीं है |और वहां की विकसित सभ्यताएं भी उसी की मर्जी से स्कोरष्टि को बेहतर बनाने का कार्य करती हैं| जैसे धरती पर विकसित देश गरीब देशों की मदद करते हैं वैसे ही विकसित गृह के प्राणी धरती के लोगों की मदद के प्रयास करते होंगे|
कहा ये भी जा रहा है कि इस साल के अंत में २१ दिसम्बर को 5D GAMMA किरण बहुतायत में धरती पर आएगी जिससे मानव चेतना का विकास होगा| जिससे आप निम्न भौतिक चेतना (3D-ALPHA) से उपर उठकर (5D-GAMMA) पर पहुंच जायेंगे| संकेत ये भी है कि कल्कि अवतार लाखों मानवों की चेतना के विस्तार के रूप में जन्म ले रहा है| वस्तुतः अवतार कोई व्यक्ति नहीं होगा हर एक के अंदर पैदा होने वाला सतोगुण होगा|
हाल ही में नासा के वैज्ञानिकों के अंटार्कटिका (Antarcitca) पर कॉस्मिक किरणों (Cosmic Rays) के अनोखी बारिश देखी. यहाँ कॉस्मिक किरणों की उल्टी बारिश हो रही थी. शोधकर्ताओं का लगता है कि इस तरह की उल्टी बारिश यानि कि कणों का उल्टी दिशा में उत्सर्जित होना यह दर्शाता है कि ये कण समय के विपरीत दिशा में लौट रहे हैं. इस खोज से ऐसा लगता है कि संकेत ऊपर जा रहे कणों से आ रहे थे. जो बर्फ से निकलने से पहले पृथ्वी की सतह के अंदर से एक सुरंग के जरिए आ रहे होंगे. लेकिन कॉस्मिक किरणें इतनी बड़ी संख्या में ऐसे नहीं आ सकतीं. ऐसा लगता है कि ये कॉस्मिक किरणें पृथ्वी की अंदर विस्फोटित हुए सुपरनोवा से आ रहीं थीं.प्रोफेसर ग्रोहैम का कहना है कि सभी लोग इस अवधारणा को स्वीकार नहीं कर पाएंगे. अभी भले ही कुछ सिद्ध न किया जा पा रहा हो, लेकिन यह तय है कि यह वैज्ञानिकों को खोज के अनंत संभावना देता दिखाई दे रहा है. वैज्ञानिकों को अनुमान है कि इस घटना से साबित हो सकता है कि हमारे आसपास ही एक दूसरा यानि समांतर ब्रह्माण्ड (Parallel Universe) है.
ये भी पढ़ें:-
क्या हम सतयुग (Golden Age) में जी रहे हैं? क्या ये दुनिया का सबसे बेहतरीन दौर है? P ATUL VINOD
क्या मानव और मानव सभ्यता दूसरी दुनिया की देन है? Are Humans the Real Ancient Aliens? P ATUL VINOD
