बाहर की दुश्मनों से भी ताकतवर दुश्मन तुम्हारे अंदर बैठा है ।
यह दुश्मन तुम्हारा संदेह है , तुम्हारा अविश्वास तुम्हारा डर है ।
इसीलिए तुम्हारी जिंदगी की बागडोर दूसरों के हाथों में चली जाती है ।
जब तुम अपने मन को मजबूत बनाते हो
तो फिर दूसरा तुम्हें अपने विचारों से प्रतिक्रियाओं से धारणाओं से और जजमेंट से हरा नहीं सकता
फिर दूसरों की राय तुम्हे प्रभावित नहीं करती
जब तुम खुद पर भरोसा करते हो
तो जरूरत नहीं कि दूसरे तुम पर भरोसा करें
क्योंकि दूसरों को यह कहने का अधिकार नहीं कि तुम क्या बनोगे ? तुम क्या करोगे ? तुम क्या कर सकते हो ? या क्या नहीं कर सकते ?
सिर्फ तुम यह कह सकते हो
सिर्फ तुम
यह तय कर सकते हो
सिर्फ तुम
अब तुम्हारा विश्वास यह तय करेगा ।
सिर्फ तुम ही नसीब लिख सकते हो दूसरा नहीं ।
अपनी किस्मत का फैसला खुद करो
अपनी परख खुद करो
अपने जज खुद बनो
अपने भविष्य का निर्धारण खुद करो ।
अपनी तकदीर खुद लिखो ।
दूसरों को अपना भाग्य लिखने के लिए कलम मत चलाओ ।
ना होनी के इंतजार में बैठो, ना होनहार के भरोसे ।
अपने मुकद्दर का सिकंदर खुद बनो
सबसे बड़ी बाधा तुम्हारे अपने अंदर है तुम्हारा संदेह, तुम्हारा शक तुम्हारे विध्वंस का कारण बनता है
खटका किस बात का , दुविधा किस बात की ।
शंका तुम्हें डूबा देगी ।
संशयात्मा विनश्यति : भगवतगीता
तुम अपनी गलत कंडीशनिंग खुद करते हो
तुम अपने अंदर घातक विचार खुद डालते हो
यदि तुम्हें अपना ख्वाब पूरा करना है, तो तुम्हें लड़ना होगा
इन से तुम्हें खुद बाहर आना होगा |
जो तुम्हारे शुभचिंतक कहलाते हैं लेकिन तुम्हें बताते हैं तुम क्या नहीं कर सकते ? ऐसे लोग खतरनाक हैं ।
इन से दूरी बना लो
सबसे खतरनाक है तुम्हारे अंदर के वह दुश्मन।
तुम्हारे दिमाग में बैठी दुश्मन सेना , तुम्हारी सफलता में बाधा है ।
तुम्हारे अंदर बैठी है फियर फेल्योर और डाउट की आर्मी ।
यह तुम्हे डराती है ।
तुम डरते हो ,अपमानित होने से
तुम डरते हो हार से
भेजे के अंदर की ये आवाजें , सिर्फ कल्पना है । यह दुश्मन सेना का छल है , इनके झांसे में मत आओ ।
अंदर के शत्रु तुम्हारी आवाज बन कर कहते हैं
मैं उतना अच्छा नहीं हूं
मैं योग्य नहीं हूं
मैं करना चाहता हूं लेकिन कर नहीं सकता
मैं योगदान करना चाहता हूं उनकी जिंदगी में जिन्हें मैं चाहता हूं , लेकिन नहीं कर सकता।
मैं प्यार के काबिल नहीं
मैं बड़ा बनने के लायक नहीं
मैं अपने सपने के लायक नहीं
मैंने सब कुछ कर लिया लेकिन यह दुनिया मेरे हक में नहीं
कोई मुझ पर विश्वास नहीं करता
मेरा जीवन जीने के काबिल नहीं
तुम्हारे अंदर के ये विचार तुम्हारे सबसे बड़े विरोधी हैं
जो तुमने ही अपने ऊपर थोप लिए हैं
तुम्हारे विचार ही तुम्हें सबसे ज्यादा पीड़ा देते हैं , ये वो आतंकवादी है जो तुम्हारे अंदर बैठे हैं
लेकिन जब तुम अपने मन का मालिक बन जाना सीख जाते हो तो तुम अपने अंदर वो आवाज पैदा कर सकते हो जो तुम्हें सहयोग दे ।
जो तुम्हारे साथ चले, उसे पाने में जो तुम चाहते हो ।
तुम्हारा दमदार भविष्य यही आवाज है, जो तुम्हारे सपने का समर्थन करती है ।
सपना जिसे पूरा करके तुम्हें गर्व हो , जैसे तुम जीना चाहते हो ।
जो सिर्फ लक्ष्य न हो , जिसके साथ हो एक सार्थक जीवन , जिसके लिए तुम उत्साह से उठो ।
जब तुम खुद पर काम करते हो , रोज ।
तो तुम सिर में बैठी दुश्मन सेना से आजाद हो जाते हो।
और अच्छा महसूस करते हो, क्योंकि तुम अच्छे हो , तुम पुण्य आत्मा हो ।
संकल्प करो रोज अपने ऊपर काम करोगे ।
उन बेकार के कामों को करना बंद कर दो जो 1 मिनट भी बर्बाद करते हैं ।
और उस समय का प्रयोग करो अपने ऊपर, अपने परिष्कार में , अपने अपडेशन और अपग्रेडेशन में ।
खुद को अधिकार दो , शक्तिशाली बनाओ , समर्थ बनाओ , जीवन को ऊंचा उठाओ
जीतने के लिए
तब तुम्हारे अंदर की आवाज सिर्फ तुम्हारे लिए काम करेगी
लेकिन पहले इसके लिए कार्य करो
भर दो अपने मन मस्तिष्क को
ताकत , प्रचंड बल , भरोसे, मजबूती ,आशा औऱ उत्साह से ।
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