मुक्ति के चरण -
जीवन का स्रोत की ओर वापसी (Jeevan ka Srot ki ओर Wapasi)
मृत्यु के क्षण में, ठीक उसी तरह जैसे भौतिक शरीर में जीवन अपने स्रोत, अहंकार की ओर वापस चला जाता है, वैसे ही यह प्रक्रिया चार चरणों में घटित होती है:
पहला चरण मृत्यु के समय होता है। जीवन शक्ति का प्रवाह, जो आमतौर पर भौतिक शरीर के परमाणुओं को एक साथ रखता है, धीरे-धीरे वापस खींच लिया जाता है। यह वापसी तत्काल नहीं होती है, बल्कि एक धीमी और व्यवस्थित प्रक्रिया है। मृत्यु के बाद, भौतिक शरीर धीरे-धीरे विघटित होना शुरू हो जाता है, प्राकृतिक तत्वों में वापस चला जाता है जहाँ से यह बना था। अब भौतिक शरीर के बंधन से मुक्त, जीवन शक्ति सूक्ष्म लोकों की ओर खींची जाती है।
2. प्राणिक शरीर से वापसी (Pranik Shareer se Wapasi):
दूसरा चरण थोड़ा जटिल है। प्राणिक शरीर, जो भौतिक शरीर की जीवन शक्ति का सांचा है, धीरे-धीरे नष्ट हो जाता है। यह विघटन भौतिक शरीर के विघटन से धीमी गति से होता है, और इसमें कुछ समय लग सकता है। इस अवधि के दौरान, जीवन शक्ति अभी भी सूक्ष्म लोकों के निचले क्षेत्रों से जुड़ा होता है।
3. सूक्ष्म शरीर से वापसी (Sookshma Shareer se Wapasi):
तीसरा चरण तब होता है जब जीवन शक्ति भावनात्मक दुनिया, या सूक्ष्म जगत को छोड़ देती है। यह आमतौर पर मृत्यु के बाद के कुछ हफ्तों या महीनों में होता है। इस समय के दौरान, जीवन शक्ति अपने पिछले जीवन के भावनात्मक लगावों को छोड़ देती है और आध्यात्मिक क्षेत्रों की ओर बढ़ने के लिए तैयार हो जाती है।
4. मानसिक शरीर से अंतिम विदाई (Mansik Shareer se अंतिम विदाई (antim vidai)):
अंतिम चरण में, जीवन शक्ति मानसिक शरीर को छोड़ देती है। मानसिक शरीर विचारों और विचार रूपों का क्षेत्र है। इसे छोड़ने में सबसे अधिक समय लग सकता है, कभी-कभी मृत्यु के बाद के वर्षों या दशकों भी लग सकते हैं। एक बार मानसिक शरीर से मुक्त हो जाने के बाद, जीवन शक्ति आध्यात्मिक क्षेत्रों में प्रवेश करने के लिए स्वतंत्र होती है, जहाँ यह आराम या उच्च आध्यात्मिक विकास के दौर से गुजर सकती है।

