कभी-कभी ऐसा लगता है कि दुनिया हमसे चीजें छिपा रही है. वह प्रशंसा, सराहना, मदद, प्यार या देखभाल को रोक रही है - वो चीज़ें जो हमें खुश और सफल बनाती हैं. लेकिन क्या होगा अगर असल में हम ही वो चीज़ें दुनिया को देने से रोक रहे हैं?
यह थोड़ा अजीब लग सकता है, है ना? ऐसा क्यों होगा? कारण अक्सर यह होता है कि हमारे अंदर कहीं, यह भावना छिपी होती है कि हम काफी अच्छे नहीं हैं या देने के लिए हमारे पास कुछ नहीं है. हम खुद को छोटा समझते हैं.
* **दुनिया को वही दीजिए जो आप चाहते हैं - भले ही अभी आपके पास न हो:** मान लीजिए आप दूसरों से सराहना चाहते हैं. तो फिर उनकी ईमानदारी से सराहना शुरू करें. उनकी उपलब्धियों को पहचानें और उन्हें बताएं कि आप उनकी कितनी इज्जत करते हैं.
* **देने का अभिनय करें, और असली चीज़ अपने आप आ जाएगी:** शायद अभी आप सच्चे दिल से सराहना नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि आपको नहीं लगता कि आप ऐसा करने के लायक हैं. कोई बात नहीं! वैसे ही बर्ताव करें जैसे आप सराहना करने में विश्वास रखते हैं. नकली नहीं, पर सकारात्मक भाव से उनकी तारीफ करें. धीरे-धीरे आप पाएंगे कि आपकी सराहना सच्ची हो गई है.
* **देना ही लेने का रास्ता है - एक सतत प्रवाह:** दुनिया एक ऊर्जा के आदान-प्रदान की तरह काम करती है. आप जितना देते हैं, उतना ही पाते हैं. यह सिर्फ भौतिक चीजों के बारे में नहीं है, बल्कि प्यार, देखभाल, खुशी जैसी चीजों के बारे में भी है. आप जितना अधिक प्यार देते हैं, उतना ही प्यार आपको वापस मिलता है.
* **आपके पास पहले से ही सब कुछ है, उसे बाहर निकालें:** कभी-कभी हमें यह एहसास नहीं होता कि हमारे पास देने के लिए बहुत कुछ है. खुशी, सराहना, मदद करने की भावना - ये सब हमारे अंदर मौजूद हैं. हमें बस उन्हें बाहर निकालने की जरूरत है. दूसरों को देने से, हम न सिर्फ उन्हें खुश करते हैं, बल्कि खुद को भी खुशी का अनुभव देते हैं. यह एक ऐसा प्रवाह बन जाता है जो लगातार बढ़ता रहता है.
कुछ हफ्तों के लिए इस तरह से चलकर देखें. दूसरों की मदद करें, उनकी सराहना करें, और देखें कि आपकी ज़िंदगी में क्या बदलाव आता है. आप पाएंगे कि खुशी, सराहना और मदद आपके पास लौटकर आ रही है, शायद उसी रूप में या किसी और रूप में. याद रखें, देने का सिलसिला शुरू करने के लिए, आपके पास पहले से ही बहुत कुछ है!
atul vinod
