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साधना के सामने खड़े हैं ये १४ विघ्न … पतंजली ने बताये हैं उपाय–

 साधना

Common Obstacles on the Spiritual Path,Overcoming Obstacles in Spiritual Life

साधना के सामने खड़े हैं ये १४ विघ्न … पतंजली ने बताये हैं उपाय– P अतुल विनोद योग साधना में शून्य से समाधि तक की राह आसान नहीं है| इस रास्ते में अनेक विघ्न खड़े हो जाते हैं|
हम हठयोग से बढ़ रहे हैं या सिद्धयोग से|
साधना कर रहे हैं या साधन हो रहा है|
गुरु कृपा से स्वंय अष्टांग योग हो रहा है या उपलब्ध विधियों का आबलंबन किया है|
साधना के मार्ग पर विघ्न बाधाएं आती है|
महर्षि पतंजलि के मुताबिक साधना में कई तरह की समस्याएं खड़ी हो जाती हैं|
आप साधना कर रहे हैं और अचानक कोई रोग उभर कर सामने आ जाए|
रोग हमारा रास्ता रोक लेता है|
हम साधना से हटकर उस रोग के प्रति चिंतित हो जाते हैं और उसके इलाज में लग जाते हैं|
रोग का इलाज ज़रूरी है लेकिन उसके लिए साधना रोकना नही|
कई बार साधना के चलते रोग उभरकर सामने आ जाते है|
ये सिर्फ रोग का ज्ञान है जो अंदर ही अंदर आपको खोखला कर रहा था साधना रोग को दबे पाँव पैर पसारने से रोकती है और उभार देती है ताकि उसे विदा करने का अवसर मिले| औषधि के साध जारी साधन से भी रोग निदान में सहायता मिलती है| 
साधना में अकर्मण्यता एक बड़ी बाधा है हमारा आलसी,प्रमादी भी होना भी हमारी साधना में बाधा खड़ी करता है| एक व्यक्ति बहुत उत्साह से साधना शुरू करता है| कुछ दिन तक उसे अच्छा लगता है लेकिन साधना के लिए उसे अपनी दिनचर्या में अनुशासन लाना पड़ता है| थोड़ा जल्दी उठना पड़ता है, इससे अंदर की अकर्मण्यता रोकती है| Idleness धीरे-धीरे साधना को बोरियत बनाकर उसमें साधना के प्रति उच्चाटन ला देती है| साधना में एक वादा है हमारा संशय| जब भी हम साधना के रास्ते पर आगे बढ़ते हैं तो हमारा Doubt रुकावट बन कर खड़ा हो जाता है| हमें लगता है कि हमारी साधना की डायरेक्शन सही नहीं है| हमारे अंदर इसकी सक्सेस के लिए भी डाउट क्रिएट हो जाता है|
कुछ महीने या लंबे समय के बाद भी हमें जब अपने अंदर किसी तरह का कोई क्रियात्मक परिवर्तन नहीं दिखता तो हम साधना से दूर होने लगते हैं| लेकिन क्रियात्मक बदलाव इतना आसान नहीं क्रिया के साथ समर्पण भी होना चाहिए पूर्ण समर्पण के साथ की गयी साधना, क्रिया ही बदलाव लाती है| भाव, श्रद्धा और विश्वास के बिना की गयी, योग, साधना, तप, क्रिया बस शारीरिक श्रम बन जाती है उससे उतना ही लाभ मिलता है जितना किसी कसरत से| साधना में एक और रुकावट है अविरति, इसका मतलब है विषयों में तृष्णा बना रहना| विषय यानी भोग विलास, हमारी आदतें, हमारे शौक| सामान्य व्यक्ति अपने जीवन में अनेक तरह के विषयों से घिरा हुआ है| जैसे उसके अनेक दोस्त हैं शाम होते ही उसे दोस्तों के साथ पार्टी में जाना है|
साधना अनुशासन मांगती है इसलिए आप रोज रोज पार्टी नहीं कर सकते| आपकी बेवजह की फ्रेंडशिप, आपकी घूमने फिरने की, टाइम वेस्ट करने की आदतें| गेम, मोबाइल, टीवी से जुड़ी हुई फन एक्टिविटी भी  समय वेस्ट करती है| इसलिए साधना के लिए समय ही नहीं बचता| आपने रात को बहुत ज्यादा ड्रिंक कर ली तो सुबह आप हैंगओवर हो गए, फिर आप सोचने लगते हैं कि मेरी आदतें साधना के जस्ट अपोसिट है| इसलिए साधना में तो मुझे फायदा मिलना ही नहीं है, सो आप खुद ही साधना से दूरी बना लेते हैं| साधना आपको बुरी आदतों से दूर रहने को नहीं कहती| साधना कहती है कि आप बुरी आदतों से दूर हों या ना हो, कुछ भी ना छोड़े, आप बस साधन करते रहें जो गैर जरूरी होगा वो अपने आप छूट जाएगा|
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कुछ लोग पहले बुरी आदतों को छोड़ने में लग जाते हैं| बुरी आदत  छूटती नहीं| इधर साधना इस चक्कर में शुरू ही नहीं हो पाती|  हम सोचते हैं कि पहले मैं अपने आपको व्यवस्थित कर लूं, अनुशासित हो जाऊ, सुबह जल्दी उठने लगूं|  हमारी ही बॉउंडेशन हमारी साधना में बाधा बन जाती है| साधना में अगली रुकावट है भ्रान्ति दर्शन:  मिथ्या ज्ञान.. हम सब आध्यात्मिक बनने के लिए साधक बनने के लिए अनेक तरह की किताबें पढ़ते हैं बहुत सारे वीडियोस देखते हैं, दिन रात हम साधना के नए-नए तरीके खोजने में लगे रहते हैं| ज्यादा जानकारी कचरे के समान है साधना में यही कचरे का ढेर बाधा बन जाता है| कई बार हम साधना में अनेक तरह के दृश्य देखने लगते हैं|
हमारा काल्पनिक संसार भ्रम बनकर हमारे सामने आ जाता है हम सोचते हैं कि हम ब्रह्म ज्ञानी हो गए| साधना में दो तीन बार भगवान के दर्शन हो गए तो हम खुद को सिद्ध माने लगते हैं और यहीं पर साधना रुक जाती है| ब्रह्म से पहले हमेशा भ्रम आता है| साधना में अगली बाघा है अलब्धभूमिकत्व:  महर्षि पतंजलि कहते हैं कि समाधि की अवस्था नहीं मिलने को अलब्धभूमिकत्व  कहते हैं|  जब समाधि की अवस्था नहीं मिलती तब साधना से मन हटने लगता है और व्यक्ति साधना छोड़ देता है|
ये अवस्था भी दूर नहीं बस थोड़ा और समर्पण चाहिए| गुरु और ईश्वर में अगाध श्रद्धा से समाधी प्राप्त हो जाती है| साधना में चित्त की चंचलता भी बाधा बनती है| साधना में बैठे और बार-बार मन इधर उधर भटक रहा है| साधना में मन का क्षोभ, दुःख, शोक, शरीर की कमजोरी, श्वास अच्छे से न ले पाना भी रुकावट है इनके कारण हम साधना मन से नहीं होती या छोड़ देते हैं| ये भी धैर्य से सध जाती है| हम साधना कर रहे हैं  और इस दौरान हमारा कोई प्रिय व्यक्ति हमसे दूर चला जाता है तो हम शोक में डूब जाते हैं, हम दुखी हो जाते हैं|
इसी तरह से कैरियर में उतार-चढ़ाव के कारण हम परेशान हो जाते हैं, गृह क्लेश के कारण भी कई बार मन साधना से हट जाता है| इसलिए साधना को इन सब से दूर रखना जरूरी है साधना ठीक उसी तरह से जीवन के लिए अनिवार्य होनी चाहिए जैसे कि भोजन पानी और अन्य नित्य क्रियाएं| कुछ भी हो जाए लेकिन साधना के समय पर बैठना ही है| जैसे हम नियमित शौच के लिए जाते हैं कोई भी बड़ी घटना हो जाए थोड़ा बहुत समय आगे पीछे हो सकता है लेकिन वो हमारी नित्य क्रिया का अनिवार्य हिस्सा है| भोजन भी कैसे न कैसे कर ही लेते हैं चाहे घर में गमी हो जाए| पानी तो श्मशान में भी पी लेते हैं? ऐसे ही साधना थोड़ी बहुत आगे पीछे हो जाए लेकिन उसके लिए समय निकालना ही है|
चित्त से जुड़ी हुई रुकावटें दूर करने के लिए हमें सुखी लोगों से मित्रता करनी चाहिए| पतंजलि कहते हैं कि सुखी लोगों से मित्रता करने से हमारा चित्त शांत होता है| दुखियों पर दया करना चाहिए| पुण्य-आत्माओं के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए और पापियों से दूर रहना चाहिए| पतंजलि चित्त की चंचलता को रोकने के लिए प्राणायाम के अभ्यास पर ज़ोर देते हैं|
पतंजलि कहते हैं कि सद्गुरु और महात्माओं के अच्छे चरित्र का ध्यान करने से भी मन स्थिर हो जाता है| लगातार स्वाध्याय करते रहने से भी मन शांत होता है| अनेक तरह की व्याधियां पैदा होने पर व्यक्ति को ओंकार का जाप करना चाहिए| लगातार ॐ का ध्यान बाधाओं को हटा देता है| ईश्वर के प्रति प्रेम और उसका लगातार चिंतन भी बाधाओं को दूर करता है|
मन में साधना के रस्ते चलने का भाव आया है तो इसे ईश्वरीय प्रेरणा मानिए बस चल पड़िए| गुरु की तलाश है तो जो सबसे अच्छा नज़र आये बना लीजिये| सही गलत का फैसला ईश्वर पर छोड़ दें गुरु गलत साधना देता है तब भी दोष आपका नही होगा आपका विश्वास आपको गुरुतत्व तक पहुंचा देगा| कदम उठाना ज़रूरी है| हर रोज़ उठाया गया एक छोटा कदम भी मंजिल को एक कदम करीब लाएगा|
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