ATUL VINOD
लाईफ में हर कोई परेशान है हर एक का अपना दुख है , लेकिन जो निराशा में आशा खोज सकता है जो दुख में सुख खोज सकता है जो परेशानी में आसानी खोज सकता है वो जीवन जीने का मूल मंत्र जान जाता है , अंधेरे में प्रकाश की एक छोटी सी किरण भी खोज ली तो समझो भव सागर को पार करने का रास्ता दिख गया , दुख तरक्की का रास्ता है , दुख हमे जगाता है , सब कुछ ठीक हो तो फिर हम सोने लगते हैं इसलिये दुख एक मौका है , दुख ज़रूरी है लेकिन दुख के साथ जीने लगना कठिनाई बन जाती है , कई लोग दुख के साथ इतने हारमोनी में चले जाते हैं कि उनकी नींद नही टूटती वो जरूर टूट जाते हैं , दुख न तो पाप है न पुण्य एक एक चेलेंज है अवसर है , अक्सर परमात्मा भी दुख में ही याद आते हैं उपरवाले से मिलने का मौका दुख ही देता है सुख नही , अपने आपको और दूसरों को समझने का मौका दुख ही देता है सुख नही , अब हमे ये सीखना है कि दुख के बादल में रोशनी कैसे खोजें , हर एक ठोकर जिंदगी के एक राज से परदा उठाती है ,
जिंदगी में न कोई गम हो अगर
जिंदगी का मजा नहीं मिलता
राह आसान हो तो रहरौ को
गुमरही का मजा नहीं मिलता ?
खोने से पाने का महत्व पता चलता है , भटकने से रास्ते का पता चलता है , जिंदगी है कि प्लस और माईनस का खेल दोनो न हो तो सर्किट बनता ही नही , मछली को पानी से निकालतो तभी उसे पानी का महत्व पता चलता है , सांसे उखडने लगे तो सांसों का पता चलता है , दूर हुए बिना पास होने का मजा नहीं होता। जुदाई न हो तो मिलने का किसे पता चलता है , आंधी से आग बढ़ती है बुझती नही चुनौतियों से हमारे अंदर की ताकत बढती है, कम नही होती , कांटों के बिना गुलाव कहां खिलते हैं
, रात के बाद ही सुबह होती है और रात न हो तो सुबह का पता ही न चले , इसलिये कहा जाता है जो कुछ होता है अच्छे के लिए होता है इस फॉर्मूले को पकड लें , हमेशा कहते रहें जो कुछ होता है अच्छे के लिए होता है , बहुत काम का सूत्र है ये , आज ही से पकड़ लें , तत्व दर्शी तो कहते हैं कि इस संसार में एसा कुछ है ही नही जो कुछ बुरा हो , जो कुछ हो रहा है हमारे ही किए धरे का परिणाम है किसी का दुर्व्यवहार भी हमारी ही गलती है किसी का दुख देना परेशान करना सबह इस या पहले जन्मों का नतीजा है अपने कर्मों का फल भोगें , और एक और फार्मूला पकड़ लें लिख दें अपने घर की दीवारों पर जो भुगते उसी की भूल , जो भुगते उसी की भूल , जो भुगते उसी की भूल , भले न दिखाई दे लेकिन हिसाब किताब तो चुकता करना ही पडता है , आज का दुख जीवन की किताब का एक पैराग्राफ है पूरा जीवन नही , सिर्फ जीवन के एक पैराग्राफ के गलत होने से पूरे जीवन को ही दुखी या खराब कैंसे कह रहे हैं आप , जैंसे किताब का एक पेज बोरिंग है तो पूरी किताब को बोर कहना ठीक है क्या , कोई भी फैसला करने से पहले सोचें एक टुकडे के कारण पूरी जिंदगी से निराश क्यों होना , तीसरा सूत्र पकडें आप सब कुछ नही हैं , आप इस दुनिया का एक टुकडा भी नही है एक छोटा सा अंश , तो कुछ परमात्मा पर भी छोड़ दें सारा बोझ खुद ही नही ढोते रहें , एक और सूत्र है आपने आपको उस परम शक्ति के फैसले के साथ एक कर लें , उसका फैसला आपको अभी दुख देना है तो उसे मान लें उस दुख को स्वीकार कर लें , इस दुनिया में आने का फैसला आपका नही था तो बाकी फैसले आपके ही कैंसे चल सकते हैं , कुछ अपनी चलायें कुछ उसकी चलने दें , अपने हाथ में जो है उसे करें , चिंता और समस्या के बारे में सोचते न रहे हैं उससे लडे नही , आप क्या कर सकते हैं वो करें एक और सूत्र हाथ पर हाथ धरकर न बैठे रहें दुख तकलीफ को स्वीकार करें और जो अपने हाथ में जो है उसे करें , यदि भगवान ने कुछ समय के लिए बेकारी लिखी है , संसाधनो की कमी लिखी है , रूखी सूखी रोटी लिखी है महल की जगह झुग्गी झोपडी लिखी है तो उसे स्वीकार करें और उससे ज्यादा पाने के लिए फिर प्रयास शुरू कर दें , जो हाथ से जा रहा है जाने दें उसके पीछे न भागें एक नई शुरूआत करें फिर से सुनलें एक नई शुरूआत करें , जो हो रहा है वो गलत ही है ये आपको कैंसे पता क्या आप उस उपरवाले से ज्यादा होशियार हैं , आपने कैंसे कह दिया जो हो रहा है वो गलत ही है , आपकी जान भी जा रही है तो ये शरीर छूटना आपके लिए गलत हो सकता है लेकिन उस ईश्वर के लिए तो वो आपका नया जन्म देने की एक प्रक्रिया भर होगी , इसलिये दुखी हों तो किसी की सांत्वना या सहानुभूति की आस में आना दुखड़ा न रोयें याद रखें अपना दुखडा रोना यानी उस दुख की स्थिति से लडना उसे न स्वीकारना यानी ईश्वर के फैसले पर सवाल इससे आपके कर्मबंधन नही कटेंगे वो दुख और लंबा होता चला जायेगा , जितना आप रोना रोयेंगे उतना ही उस हालात के और ज्यादा शिकार बनते चले जायेंगे , इस चैनल पर अपको एक कृतज्ञता का वीडियो मिलेगा जिसे आप रोज़ सुनें, मंदिरों में सिर्फ इसलिए माथा मट टेकना क्यूंकी आप दुखी हैं , दुख मिटाने के लिए भगवान पर दवाब मत बनाना , उसका तो वैंसे ही शुक्रिया करना क्योंकि उसने इतना सब कुछ मुफत में दे रखा है उसके सामने शिकायतों की झडी मत लगाना बस जो मिला है उसी के लिए उसका धन्यवाद कहना , न ही गम गलत करने मयखाने निकल पडना , ये लहर का काम नही कि वो सागर का फैसला करे हम लहर हैं हमे अपना काम करना है , जो भी आयेगा उसे जाना होगा , जीवन आया है चला जाता है , दिन आता है चला जाता है , ये जो घडी है ये भी चली जायेगी इसलिए एक और सूत्र पकड लीजिये ये जो दुख है वो भी चला जायेगा , हर क्षण नये का निर्माण हो रहा है , यदी आप सुखी थे और अब दुख है तो ये कहां गलत है क्योंकि सुख के बाद दुख को आना ही था , सब नियम के मुताबिक ही तो चल रहा है , पद पर थे अप वहां से उतर गए , उतरें हैं तो फिर बैठ जायेंगे , जो नियम को मान लेता है उसे नियमानुसार दुख के बाद सुख मिलेगा है वरना नियम आपने तोडा इसे मानने से इंकार किया तो ये स्थाई भी बन सकता है , बस ध्यान नियामतों पर देना है पूरा शरीर स्वस्थ्य है उस पर ध्यान नही जाता लेकिन एक छोटी बीमारी हो जाये तो फिर उसी के बारे में सोचते रहना और उसे अपने उपर हावी हो जाने देना , यही तो प्रवकत्ति बन गई है हम सबकी , बीमारी को नही स्वास्थ्य को देखो , जीवन से प्रेम करें घ्रणा नही , जीवन को कोसना बंद कर दें , प्रेम करना सीखें , आनंदित रहना सीखें इतना ही कर लिया तो आप संत हो जाते हैं और ऐसा व्यक्ति दूसरों को ब्लेसिंग्स भी दे सकता है उन्हे वरदान भी दे सकता है , ये सूत्र भी ले लिख लीजिये प्रेम आनंद कृतज्ञता मैत्री करूणा और अवेयरनेस इन्हे हमेशा अपने साथ रखिये , ध्यान का मतलब सिर्फ आसन लगा कर बैठना नही ध्यान का मतलब है हमेशा अपने विचारों भावनाओं के प्रति अवेयर रहना जागरूक रहना , दुख को अपने सर पर मत बिठाईये क्योंकि इससे निराशा पैदा होगी और जो निराशा दिल को बुझा देती है , हमारे अंदर की आग शांत हो जाती है , इच्छायें आकांक्षायें सो जाती है निराश होती हैं, तब हृदय की वह अग्रि बुझ जाती है और वे सारी अभीप्साएं सो जाती हैं, जिनके कारण हम मनुष्य हैं
निराशा पाप है, आत्मघात है क्योंकि ये हमे नीचे गिराती है और जो उपर नही उठता वो नीचे गिर जाता है, और जो आगे नहीं बढ़ता, वह पीछे धकेल दिया जाता है। यदी पहाड़ पर नही चढोगे तो घाटियों में जाना तय है , आशा एक किरण है जिसकी मैने शुरूआत में बात की इससे हमारे अंदर की विराट शक्ति जागती है , हम बीच है जो मिटटी में पडे हैं , लेकिन उस बीच को पानी मिल जाये तो वो पेड बन सकता है आशा पानी है जो हमारे अंदर की संभावनाओं के बीज को वृक्ष बना सकती है , बुझे हुए जीवन को क्या जीवन कहा जा सकता है , जीवन संभावना है , और ये संभावना साधना से बलवती होती है , उठिये और निराशा को फेंक दीजिये , निराशा सिर्फ हमारा भाव है जिसका स्विच हमारे पास है उठाईये अपनी भावनाओं का रिमोर्ट और फ्रीक्वेंसी चेंज कर दीजिये , याद रखिये कि हमने जो भी कुछ बार बार चाहा है, विचारा है और उसकी भावना की है वही हम आज हैं । हमारे अपने अंदर ही परिवर्तन का रिमोट है , विचारों को बदलना कपडे बदलने से भी आसान है , निराशा आत्मा को ज़जीर से बांध देती है
आशा आत्मा का स्वभाव है, स्वरूप है। निराशा मानसिक बेडी है ख् अपने आपको भर दीजिये लंबी और गहरी सांसों से , सांस लेने में क्या कंजूसी लीजिये पूरी सांस लंबी और गहरी सांस और फिर देखिये कैंसे आपके प्रांणों में आशा का संचार होता है , छोटे—छोटे बच्चों की आंखों में आशा के दीप जलते हैं? — और पशुओं की आंखों में भी और पक्षियों के गीतों में भी?जो भी जीवित है, वह आशा से जीवित है और जो भी मृत है, वह निराशा से मृत है। आकाश छूने की आशा और आकांक्षा का आंदोलित छेड़ दीजिये गहरे से गहरे प्राणों में सोई हुई शक्तियां जाग जाएंगी। जितनी तुम्हारी इच्छा की ऊंचाई होती है, उतनी ही शक्ति की गहराई भी होती है। हम ऐसी परिस्थितियों में घिरे है , जो प्रतिकूल हैं और उपर उठने से रोकती हैं। लेकिन ध्यान में रखना कि जो उपर उठे, वे सभी कभी ऐसी ही परिस्थितियों से घिरे थे। परिस्थितियों का बहाना मत लीजिये परिस्थितियां नहीं, वह बहाना ही असली रोढा है कोई अंधेरा इतना घना नही हो सकता कि वो दीपक की रोशनी को फैलने से रोक सके , सब कुछ बदल जाता है बदलने दो