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जाने अपने अंदर की जादुई शक्ति के बारे में

ATUL VINOD 



दुनिया के ज्‍यादातर लोग एक जिन्‍न की तलाश में हैं वो रोग दोष शोक से छुटकारा चाहते हैं तो अपने सपनों का श्रजन चाहते हैं , लोग मुझसे भी कोई जादुई विधि पूछते हैं जो उन्‍हे मुसीबतों से छुटकारा दिला दे और मनचही चीजें दिला दे , तो आज मैं आपको बता रहा हूं ऐसे ही एक जिन्‍न के बारे में जो भगवान ने हमे अपने जन्‍म के साथ ही भेजा है , वो एक शक्ति है जो हमारे दिमाग में इनबिल्‍ट है , दिमाग और मन अलग अलग हैं ब्रेन हार्डवेयर है और माईंड साफटवेयर , कल्‍पना मन की सबसे बडी शक्ति भी है और सबसे बड़ा विनाशकारी औजार भी , कल्‍पना से महाकाव्‍य भी बने हैं और इसी कल्‍पना ने बम भी बनाये हैं .

 कल्‍पना ने महान विभूतियां भी बनाई हैं और विक्षिप्‍त  हिटलर माओ मुसोलिनी भी बना डाले
जो जैंसा बना वो उसकी कल्‍पना ही साकार हुई थी , इसी कल्‍पना से टीवी मोबाईल उपग्रह बने और इसी कल्‍पना ने घातक अस्‍त्र शस्‍त्र औजार वायरस बना डाले , कल्‍पना से हम भयानक रोगों से मुक्‍ती पा सकते हैं और स्‍वस्‍थ्‍य शरीर को बीमारियों का घर भी बना सकते हैं  , कल्‍पना ने ही हमे चांद पर उड़ने की शक्ति दी और कल्‍पना ने ही भीषण युदध पैदा किए , सबकी कल्‍पना काम करती है छोटा हो या बड़ा , अच्‍छा हो या बुरा.

कल्‍पना ने हर असंभव को संभव बनाया है , जो कुछ इस संसार में बनाये गए उपकरण हैं वो इसी मिटटी से ही तो निकले हैं , कल्‍पना गहरे तल पर पंहुच जाये तो सत्‍य बन जाता है , कप्‍लना से एक कुरूर सुदर बन सकता है तो एक सज्‍जन दुर्जन , विचारों को बार बार दोहराकर कल्‍पना को प्रगाढ बनाकर कुछ भी किया जा सकता है , यदि बीमार हो तो महसूस करो कि मैं स्‍वस्‍थ्‍य हूं , दोहराते रहो स्‍वास्‍थ्‍य को अपना मंत्र बना लो , और यदि कल्‍पना में स्‍वस्‍थ्‍य हो गए तो हकीकत में भी हेल्‍दी हो जाओगे , सोते वक्‍त उठते वक्‍त बस अपने चंगे होने की कल्‍पना करो , सोचो की मैं फिट हूं , आनंदित हूं , खुश हूं , ताकतवर हूं , हर अंग स्‍व्‍स्‍थ्‍य है जोरदार है , यदि कुरूप को लोग सुंदर कहना शुरू कर दें तो वो सुंदर बन जायेगा लोग न कहें वो खुद अपने आपसे कहे अपने आपको सुंदर जाने और माने भले कल्‍पनाओं में वो वैसा ही बन जायेगा , बच्‍चे को बार बार बेवकूफ मंदबुदधी कहो वो वैसा हो जायेगा मुर्ख को बुदधीमान कहो वो वैसा हो जायेगा , कप्‍लना सीधे विश्‍व की शक्ति से जुडी है ये वेटर है आपका यूनिवर्स के कैटलॉग से आपके आर्डर को पूरा करवाने का सामर्थ्‍य रखता है.

इसीलिये आजकल आत्‍मसुझाव आत्‍मसम्‍मोहन का प्रचलन चल पडा अफरमेशन और ऑटोशजेशन इसी कल्‍पना शक्ति के दम पर आपको मनचाही चीजें देने में मदद करते हैं , बडे से बडे अविष्‍कार मन में आये कल्‍पना शक्ति इन इस विचार रूपी बीज को व्रक्ष में बदल दिया , कल्‍पना उर्वरक भूमि है जिसमें आप अपने विचार बो सकते हैं , कुछ करने या बनने की इच्‍छा नही करना बस उसे आज और अभी साकार होते देखना उसके साथ रम जाना उसमें बह जाना उसके साथ एकाकार हो जाना , लक्ष्‍य हासिल होगा ये सोचा तो समझो तुम्‍हारे और उसके बीच एक दूरी पैदा हो गई , दूरी तो रखनी ही नही बस सोचो की लक्ष्‍य हासिल हो गया , बस ये कल्‍पना ही आपको उस फ्रीक्‍वेंसी पर पंहुचा देगी जो उस लक्ष्‍य को आपके हाथों में देदे , कल्‍पना इसी क्षण में केंद्रित हो , यदि हम कुछ पढ़ रहे हैं तो उसके साथ उस तथ्‍य की कल्‍पना भी करें तो वो ज्ञान स्‍थाई बन जायेगा , हमेशा याद रहेगा , पूरे शरीर पर कल्‍पना का राज होता है कल्‍पना शक्ति के दम पर तिब्‍बती लामा माईनस टेम्‍प्रेचर पर भी पसीना ले आते हैं , कल्‍पना के प्रयोग के कुछ नियम हैं पहले विचार जिनकी दिशा आपकी मनचाही चीजों की तरफ हो ,, विचारों की दिशा भटके नही , जो चाहते हैं सिर्फ उसके विचार , फिर उन विचारों के साकार होने की भावनायें , प्रेम चाहते हैं तो प्रेम के विचार और प्रेम की ही भावनायें विचार प्रेम पाने के होंगे और भावना नफरत की होगी तो नतीजा नही मिलेगा , जो चाहते हैं उसे लिख लें उसके चित्र बना लें , मकान चाहते हैं तो मकान बनाने का विचार आदर्श मकान में रहने की भवनायें , उस मकान का नक्‍शा , ले आउट , हो सके तो एक माडल  बना लें , लगातार मनचाहे मकान में रहने की कल्‍पना , आपने मनचाहे मकान को कल्‍पनाओं में देखते रहें , रात दिन उसी का चिंतन उसी का मनन , खुद को शक्तिशाली समझे और मानें , सुख प्राप्ति का मूल किसी बाहरी जगत की वस्तु में नहीं हमारी कल्पना में है। मन में जैसी कल्पना अंकित होती है उसी क्‍वांटिटी में अनुभव होता है। हमारा भाग्य प्रारब्ध, सुख दुख का रहस्य कल्पना देवी के ही पास  है। इच्छा हो तो कल्पना शक्ति जरिये हम आनन्द के सर्वोच्च शिखर पर पंहुचकर जीवन को आनन्दमय बना सकते हैं। कल्पना हमें सम्पूर्ण आधि−व्याधियों, दुखों, चिन्ताओं से मुक्त कर सकती है। सुबह उठते ही पहली बात, कल्पना करें कि हम बहुत प्रसन्न हैं  बिस्तर से प्रसन्न-चित्त उठें– आभा-मंडित, प्रफुल्लित, आशा-पूर्ण– जैसे कुछ समग्र, अनंत बहुमूल्य होने जा रहा हो। अपने बिस्तर से बहुत विधायक व आशा-पूर्ण चित्त से, कुछ ऐसे भाव से कि आज का यह दिन सामान्य दिन नहीं होगा — कि आज कुछ अनूठा, कुछ अद्वितीय प्रतीक्षा कर रहा है;  वह करीब है। इसे दिन-भर बार-बार स्मरण रखने की कोशिश करें।  सात दिनों के भीतर पायेंगे कि हमारा पूरा, पूरा ढंग, पूरी तरंगें बदल गई हैं।जब रात को सोते हो तो कल्पना करें कि  हम दिव्य के हाथों में जा रहे हैं …जैसे अस्तित्व हमे सहारा दे रहा हो, हम उसकी गोद में सोने जा रहे हैं । बस एक बात पर निरंतर ध्यान रखना है कि नींद के आने तक कल्पना करते जाना है ताकि कल्पना नींद में प्रवेश कर जाए, वे दोनों एक दूसरे में घुलमिल जाएं।
किसी नकारात्मक बात की कल्पना मत करें, क्योंकि जिन व्यक्तियों में विधायक  कल्पना करने की क्षमता होती है, अगर वे ऐसी कल्पना करते हैं तो वह वास्तविकता में बदल जाती है। अगर कल्पना करते है कि हम दिव्य शक्ति से भरपूर आनंद पूर्ण उत्सव पूर्ण हैं तो  तुरंत ही खुशी आनंद सब तरह की विधायक शक्तियो के लिए खुल जाते हैं । हमारी कल्पना उसे साकार कर देगी।तो जब भी कोई नकारात्मक विचार आए तो उसे एकदम सकारात्मक सोच में बदल दें। उसे नकार दें, छोड़ दें उसे, फेंक दें उसे।एक सप्ताह के भीतर हमे अनुभव होने लगेगा कि तुम बिना किसी कारण के प्रसन्न रहने लगे हो— बिना किसी कारण……….