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मुक्ति - मोक्ष - स्तर

 मुक्ति - मोक्ष - स्तर

परम सत्य मय महाशुन्य - 1-परमात्मा - सबमें + सबसे परे - आकार + निराकार में - शून्य और महाशुन्य में भी - व्यक्त भी अव्यक्त भी- व्यष्टि में भी समष्टि में भी - शून्य में भी अशून्य में भी - दृश्य अद्रश्य और इससे परे भी - सर्वव्यापी
सत+ चित + आनंद मय शुन्य- 2-आत्मा - जीवात्मा का आधार - निर्लेप - असंग - मुक्त - नित्य- शुद्ध - बुद्ध - सत चित आनंद - व्यापी
प्राण मय 3-जीवात्मा - आत्मा पर आधारित- व्यष्टि - आकार - देह - लिप्त - संग - अनित्य - अशुद्ध - असत - अचित - निरानंद - बद्ध
मन मय - 4- सूक्ष्म शरीर - आत्मा और जीवात्मा पर आधारित देह -
अन्नं मय -5 - स्थूल शरीर - दिखने वाला शरीर -
हमारा अस्तित्व - सात का समुच्य है - सत, चित, आनंद, ज्ञान, प्रण, मन और अन्न यानी सात खोल, हर एक मुक्ति में एक खोल हटती है| हर खोल में भी सात खोल होती हैं|
सात को तीन भागों में समाहित किया गया है- शरीर - मन और आत्मा - स्थूल - सूक्षम और कारण
आम तौर पर मुक्ति को सीधे परमात्मा में मिलन माना जाता है| लेकिन ये भी एक मान्यता है कि पहले स्थूल जगत से मुक्ति मिलती है फिर सूक्षम जगत आता है जिसमे अनेक सूक्षम लोक आदि हैं| जहाँ शरीर का बंधन नहीं है| स्थूल जगत में प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थर हैं, इसके बाद स्थूल देह कि अनिवार्यता ख़त हो जाती है| फिर सूक्षम देह के चतुर्थ पंचम और चतुर्थ स्तर आते हैं| इसके बाद ब्रम्ह का स्तर जिसे शून्य का स्तर कहा जाता है फिर महाशुन्य आता है यानि परब्रम्ह का स्तर| जिसे महाशुन्य भी काहा जाता है|
८४ लाख योनियों कि यात्रा का क्रम
खनिज, पञ्च भूतों का स्तर 1. भौतिक और अनुभूति: निर्जीव पदार्थों में चेतना की शुरुआत। लाखों योनियाँ
जीव जंतुओं का स्तर 2. हृदय और भावना: जीवित प्राणियों में वृद्धि और गतिशीलता। लाखों योनियाँ
मानव देह का स्तर 3. मानसिक और विचार: स्वतंत्र चेतना, आत्म-जागरूकता और चुनाव। लाखों योनियाँ
अति मानव देह का स्तर4 . संबंध, क्रिया और व्यवहार: स्वयं या दूसरों की सेवा का चुनाव। लाखों योनियाँ
आत्म देह 5. आत्मा और ऊर्जा: पृथक्करण का भ्रम समाप्त, संतुलन का पता चलता है। लाखों योनियाँ
उच्च आत्म देह 6. उच्चतर आत्म: ध्रुवीयता का अंत, स्रोत चेतना का हिस्सा। लाखों योनियाँ
शून्य देह - 7. आध्यात्मिक और स्रोत चेतना: भौतिक वास्तविकता का अंत, शाश्वत चेतना में विलय। अज्ञात योनियाँ - गॉड पार्टिकल्स, डार्क एनर्जी , सौर्स एनर्जी फॉर्म
ब्रम्ह देह 8. अगले आयाम का प्रथम घनत्व: हमारे ज्ञान से परे।
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