Type Here to Get Search Results !

अतिमन की रहस्यमयी दुनिया- श्री अरविंद

 

अतिमन की रहस्यमयी दुनिया- श्री अरविंद

एक ऐसी दुनिया जहाँ चेतना अपनी चरम सीमा पर है, जहाँ सत्य का प्रकाश हर कोने को रोशन करता है, और जहाँ सृजनात्मकता की शक्ति हर क्षण नए चमत्कारों को जन्म देती है। यह दुनिया है अतिमन की, जो हमारे सामान्य मानस से परे स्थित चेतना का एक उच्चतर लोक है।

अतिमन क्या है?

श्री अरविंद के अनुसार, अतिमन चेतना का एक ऐसा स्तर है जो हमारे सामान्य मानस से कहीं अधिक विशाल और शक्तिशाली है। यह दिव्य सत्य और सृजन का क्षेत्र है, जहाँ विभिन्न दिव्य शक्तियाँ पृथक-पृथक कार्य करती हैं। अतिमन में, हम पृथ्वी पर अनुभव किए जाने वाले द्वंद्वों और सीमाओं से मुक्त हो जाते हैं। यहाँ, हम एकता का अनुभव करते हैं, जहाँ सभी चीजें एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और एक ही स्रोत से उत्पन्न होती हैं।

अतिमन की विशेषताएं:

  • विश्वव्यापी सत्य का स्रोत: अतिमन को दिव्य सत्यों का स्रोत माना जाता है। यह वह स्थान है जहाँ विभिन्न सत्य अपने शुद्धतम रूप में मौजूद होते हैं, अज्ञान और अशुद्धियों से अछूते। यहाँ हम सत्य की गहरी समझ प्राप्त कर सकते हैं और ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर कर सकते हैं।

  • सृजनात्मक शक्तियों का निवास: अतिमन को सृजनात्मक शक्तियों का निवास माना जाता है। यहाँ विचार और संभावनाएँ अपने शुद्ध रूप में विद्यमान होती हैं। अतिमन के द्वारा ही ब्रह्मांड में विभिन्न लोकों और सृष्टि का निर्माण होता है। यहाँ हम अपनी कल्पना और रचनात्मकता को नए आयामों तक ले जा सकते हैं और अद्भुत चीजों का निर्माण कर सकते हैं।

  • अधमना और चित्त से भिन्न: अतिमन को अधमना (अवचेतन मन) और चित्त (चेतन मन) से भिन्न माना जाता है। ये दोनों मन के निचले स्तर हैं जो अहंकार, इच्छाओं और भ्रम से प्रभावित होते हैं। अतिमन शुद्ध चेतना का क्षेत्र है। यहाँ हम अपने अहंकार और नकारात्मक विचारों से मुक्त होकर वास्तविक स्वरूप का अनुभव कर सकते हैं।

  • अधमना और सुपरमना के मध्य सेतु: अतिमन अधमना (अज्ञान) और परम चेतना (सुपरमना) के बीच एक सेतु के समान कार्य करता है। यह अधमना को सुपरमना के सत्य से जोड़ता है, लेकिन साथ ही साथ अपने चमकदार आवरण से उस सत्य को हमारी दृष्टि से छिपा भी देता है। अतिमन के माध्यम से ही हम धीरे-धीरे अज्ञान से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं और सुपरमना की चेतना तक पहुंच सकते हैं।

अतिमन तक कैसे पहुँचे?

अतिमन तक पहुँचने के लिए योग का अभ्यास करना सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। योग हमारे चित्त को शुद्ध करने और अहंकार को कम करने में मदद करता है, जिससे अतिमन की शक्तियों के खुलने का मार्ग प्रशस्त होता है। इसके अलावा, ध्यान, प्रार्थना और आत्म-अवलोकन जैसी अन्य आध्यात्मिक साधनाएं भी हमें अतिमन की ओर ले जा सकती हैं। गुरु सियाग योग, सिद्धयोग, महायोग, शिवयोग, सिद्ध्माहायोग अतिमन के माध्यम से ही उतरते हैं| 

अतिमन का महत्व:

अतिमन का हमारे जीवन में बहुत महत्व है।

  • ज्ञान और आत्मज्ञान प्राप्ति: अतिमन हमें सत्य की गहरी समझ प्रदान करता है और हमें आत्मज्ञान प्राप्त करने में मदद करता है।

  • सृजनात्मकता और प्रेरणा: अतिमन हमारी रचनात्मकता और प्रेरणा को बढ़ाता है, जिससे हम जीवन में महान कार्य कर सकते हैं।

  • आनंद और शांति: अतिमन हमें आनंद और शांति की अनुभूति प्रदान करता है, जिससे हम जीवन के तनावों और चिंताओं से मुक्त हो सकते हैं।

श्री अरविंद के अनुसार, अतिमन चेतना का एक उच्चतर लोक है जो हमारे सामान्य मानस से परे स्थित है। इसे ब्रह्मांडीय सत्य और सृजन का क्षेत्र माना जाता है, जहाँ विभिन्न दिव्य शक्तियाँ पृथक-पृथक कार्य करती हैं। यहाँ अतिमन के कुछ प्रमुख गुण हैं:

  • विश्वव्यापी सत्य का स्रोत: अतिमन को दिव्य सत्यों का स्रोत माना जाता है। यह वह स्थान है जहाँ विभिन्न सत्य अपने शुद्धतम रूप में मौजूद होते हैं, अज्ञान और अशुद्धियों से अछूते।

  • सृजनात्मक शक्तियों का निवास: अतिमन को सृजनात्मक शक्तियों का निवास माना जाता है। यहाँ विचार और संभावनाएँ अपने शुद्ध रूप में विद्यमान होती हैं। अतिमन के द्वारा ही ब्रह्मांड में विभिन्न लोकों और सृष्टि का निर्माण होता है।

  • अधमना और चित्त से भिन्न: अतिमन को अधमना (अवचेतन मन) और चित्त (चेतन मन) से भिन्न माना जाता है। ये दोनों मन के निचले स्तर हैं जो अहंकार, इच्छाओं और भ्रम से प्रभावित होते हैं। अतिमन शुद्ध चेतना का क्षेत्र है।

  • अधमना और सुपरमना के मध्य सेतु: अतिमन अधमना (अज्ञान) और परम चेतना (सुपरमना) के बीच एक सेतु के समान कार्य करता है। यह अधमना को सुपरमना के सत्य से जोड़ता है, लेकिन साथ ही साथ अपने चमकदार आवरण से उस सत्य को हमारी दृष्टि से छिपा भी देता है।

अतिमन तक पहुँचने के लिए श्री अरविंद योग का अभ्यास करने की सलाह देते हैं। योग हमारे चित्त को शुद्ध करने और अहंकार को कम करने में मदद करता है, जिससे अतिमन की शक्तियों के खुलने का मार्ग प्रशस्त होता है।

श्री अरविंद के अनुसार, अतिमन चेतना का एक उच्चतर लोक है जो हमारे सामान्य मानस से परे स्थित है। यह निम्न विशेषताओं वाला माना जाता है:

  • दैवीय सत्य का क्षेत्र: अतिमन को दिव्य सत्य का क्षेत्र माना जाता है। यह वह स्थान है जहाँ चीजें अपने शुद्धतम रूप में मौजूद होती हैं, अज्ञान और विकृतियों से अछूती।

  • सर्वव्यापक सत्य का अनुभव: अतिमन में, सत्य का अनुभव सार्वभौमिक और समग्र होता है। यह व्यक्तिगत मन की सीमाओं से मुक्त होता है और सभी चीजों में अंतर्निहित एकता को समझने में सक्षम होता है।

  • सृजनात्मक शक्ति का स्रोत: अतिमन को सृजनात्मक शक्ति का स्रोत माना जाता है। यह वह जगह है जहाँ विचार और संभावनाएँ शुद्ध रूप में मौजूद होती हैं।

  • मानस से ऊपर: अतिमन हमारे मानस से ऊपर है, जिसका अर्थ है कि यह तर्क और विश्लेषण से परे है। यह अंतर्ज्ञान के माध्यम से जाना जाता है।

  • अधमना (अवर मन) और चित्त (चित्त) से भिन्न: अतिमन को अधमना (अवचेतन मन) और चित्त (चेतन मन) से अलग माना जाता है। ये दोनों मन के निचले स्तर हैं जो अहंकार, इच्छाओं और भ्रम से प्रभावित होते हैं।

अतिमन और चित्त में अंतर

  • ज्ञान प्राप्त करने का तरीका: चित्त इंद्रियों और तर्क के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करता है, जबकि अतिमन अंतर्ज्ञान के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करता है।

  • सत्य की प्रकृति: चित्त द्वैत (duality) में फंसा हुआ है, चीजों को अलग-अलग इकाइयों के रूप में देखता है। अतिमन अद्वैत (non-duality) का अनुभव करता है, सभी चीजों में अंतर्निहित एकता को समझता है।

  • सामर्थ्य: चित्त सीमित है और अज्ञान से ग्रस्त है। अतिमन सार्वभौमिक ज्ञान और सृजनात्मक शक्ति का स्रोत है।