प्रतीकों का महत्व और उनका स्मरण
यह अंश दीक्षा समारोह के दौरान प्रदान किये जाने वाले गुप्त ज्ञान को याद रखने के महत्व को बताता है। ये गुप्त ज्ञान प्रतीकों के रूप में दिये जाते हैं।
प्रतीकों को समझना और याद रखना
ये ज्ञान बताता है कि ये सभी प्रतीक आपस में जुड़े हुए होते हैं और मिलकर सात रहस्यों में से एक रहस्य को व्यक्त करते हैं। दीक्षित व्यक्ति को उन्हें न केवल सुनना होता है बल्कि देखना भी होता है। अपनी इच्छा शक्ति के प्रयोग द्वारा उसे उन्हें अपनी स्मृति में अंकित करना होता है। ऐसा करने में उसकी तीन प्रकार से सहायता की जाती है:
- दीर्घकालिक निरीक्षण अभ्यास: यह अभ्यास अभी से शुरू किया जा सकता है। ध्यानपूर्वक वस्तुओं को देखने और उनका विवरण स्मृति में बिठाने का अभ्यास करने से दीक्षा समारोह में दिखाए गए प्रतीकों को जल्दी से समझने में मदद मिलती है।
- कल्पना शक्ति का विकास: ध्यान के अभ्यास में मानसिक चित्रों के निर्माण पर बल दिया जाता है। इसका दोहरा उद्देश्य होता है: (क) विचार रूपों को सटीक रूप से कल्पना करना सीखना ताकि भविष्य में सचेत रूप से सृजन करते समय कोई गलती न हो। (ख) दीक्षा के दौरान दिखाए गए गुप्त ज्ञान को सही रूप से स्मरण करने के लिए उसकी कल्पना शक्ति को मजबूत करना।
- अन्य व्यक्तियों की इच्छा शक्ति: समारोह के दौरान दीक्षा दंड को पकड़ने वाले चार अन्य महान सत्ताओं की दृढ़ इच्छा शक्ति भी दीक्षित व्यक्ति की समझ को तीव्र करने में सहायता करती है।
