शिष्य की यात्रा के विभिन्न चरण (विस्तृत विवरण)
तीन निम्न लोकों और तीन शरीरों में कार्य करना
गुरु शक्ति / दिव्य शक्तियां बताती हैं कि शिष्य की यात्रा के ये चरण तीन निम्न लोकों (भौतिक, सूक्ष्म और कारण लोक) और उसके तीन शरीरों (स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर) में घटित होते हैं। प्रत्येक शिष्य की यात्रा उसके विशिष्ट रे (Ray) और उप-रे (Sub-ray) से प्रभावित होती है, जो उसकी आध्यात्मिक प्रकृति को निर्धारित करते हैं।
प्रत्येक चरण शिष्य के लिए एक परीक्षा और प्रशिक्षण का समय होता है। उसे ऊर्जा का सही उपयोग करना सीखना होता है और आध्यात्मिक शक्तियों को नियंत्रित करना होता है।
ज्ञान भवन से विज्ञान भवन की ओर
सही दिशा में ऊर्जा का प्रवाह और चतुराई से बल धाराओं के संचालन के माध्यम से शिष्य को "ज्ञान भवन" से "विज्ञान भवन" तक ले जाया जाता है। ज्ञान भवन में वह सीखता है, जबकि विज्ञान भवन में वह अनुभव करता है।
विज्ञान भवन में आत्मिक जागरण
विज्ञान भवन में, शिष्य अपने अहंकार और उसके समूह में निहित शक्तियों और क्षमताओं के बारे में धीरे-धीरे "जागरूक" हो जाता है। वह अपने अहंकार समूह की ऊर्जा का उपयोग कर सकता है, लेकिन अब उस पर भरोसा किया जाता है कि वह इसका इस्तेमाल सिर्फ मानवता की भलाई के लिए करेगा।
इसके बाद शिष्य "ग्रह-मण्डल के लोगो" (Planetary Logos) की ऊर्जा का एक हिस्सा साझा करने और उसे संभालने में सक्षम हो जाता है। इससे वह ब्रह्मांड के विकास के लिए उस लोगो की योजनाओं को आगे बढ़ाने में सक्षम हो जाता है।
संक्षेप में
शिष्य की यात्रा कठिन परीक्षाओं और प्रशिक्षण से भरी होती है। वह धीरे-धीरे आध्यात्मिक शक्तियों को समझता और उनका उपयोग करना सीखता है। आखिरकार, वह मानवता की सेवा करने और ब्रह्मांड के विकास में योगदान करने के लिए एक शक्तिशाली व्यक्ति बन जाता है।
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