ATUL VINOD
शारीरिक समस्याओं की भरमार , बीमारियों का घर , मोटापा , बुढापे की आमद इन सब से से बचना हो तो सिर्फ एक फार्मूला है अपने शरीर को एल्कलाईन कर लो कैंसर भी भाग जायेगा बिना डॉक्टर के
शरीर की प्रकृति को क्षारिय रखने में सफलता हासिल कर ली जाये तो कोई भी बीमारी इसमें ठहर नही सकती , मानव शरीर का प्राकृतिक स्वभाव क्षारिय (एल्कलाईन) है , नोबेल प्राइज विजेता डॉ ओट्टो वार्बर्ग ने 1931 दावा किया कि कैंसर भी एल्कलाइन शरीर में जीवित नही रह सकता
अब सवाल ये उठता है कि ये एल्कलाईन बॉडी है क्या , आपने पीएच के बारे में तो सुना ही होगा , साधारण तौर पर हम पानी के पीएच लेबल पर जानकारी रखते हैं , यानी पानी में पोटेंशियल ऑफ हाईड्रोजन कितना है , इसी तरह मानव शरीर का भी पीएच लेबल होता है , यदि मनुष्य के शरीर का पीएच 7 से कम पंहुच जाये तो इसकी तासीर अम्लीय हो जाती है यानी एसीडिक और यदि शरीर का पीएच 7 से ज़्यादा हो जाये तो इसकी तासीर क्षारिय हो जाती है , मान्यता है कि हमारे खून का एवरेज पीएच 7.35 से 7.45 के बीच होता है इससे कम हुआ तो बीमारियां , कमज़ोरी , बुढ़ापा घर करने लगता है इससे ज़्यादा तो सब कुछ तरोताज़ा , हैल्थी , फिट , इनरजेटिक और आनंददायक
दुनिया भर में मनुष्य की एसिडिक और एल्कलाईन प्रवृत्ति पर शोध हो रहे हैं , और ये बात राहत पंहुचाने वाली है हम सिर्फ खानपान और विचार प्रक्रिया को बदलकर खुद का कायाकल्प कर सकते हैं I
चिंता की बात ये है कि दुनिया के ज़्यादातर लोग अम्लीय हैं , इसी वजह से उन्हे बीमारियां घेरे हुए हैं I
शरीर में पीएच को एक से 14 तक के पैमाने पर आका जा सकता है , हमारा पीएच लेबल क्या है इसका अनुमान हम खुद लगा सकते हैं , थकान, कमजोरी, बीमारियां, जल्द बुढ़ापा घर करने का मतलब है हमारे शरीर का पीएच 7 से कम होता जा रहा है हम एसीडिक होता जा रहे हैं .
क्षारीयत बढा देने से शरीर की जीवनशक्ति वापस लाई जा सकती है , और इससे पूरे शरीर की प्रणाली को संतुलित किया जा सकता है .
हमारे एसीडिक होने का सिम्पटम सबसे पहले लिवर देने लगता है अपच ,गैस जैसी समस्यायें इसके संकेत हैं , इसका मतलब है लिवर में एसिड बढ़ गया है और एल्कलाईन मिनरल्स आंतों में नही पंहुच रहे हैं , अम्लता बढ़ जाने से हार्ट बीमार पड़ने लगता है , प्रतिरक्षा प्रणाली कमज़ोर पड़ने लगती है , श्वसन प्रणाली पर बुरा असर पड़ता है , कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिल पाने से वो बीमार होने लगती हैं , जब एसीडिक एनवॉयरमेंट बढ़ जाता है तो फैफड़ों में सर्दी, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा जैसे रोग लग जाते हैं गठिया , जोड़ों का दर्द , सूजन जैसे रोग भी इसी का नतीजा हैं , एसिडिक तासीर हडिडयों का नुकसान पंहुचाने लगती हैं .
हमारी दिनचर्या और खानपान सीधे तौर पर हमारे पीएच लेबल पर फ़र्क डालते हैं , एक दिन में ही हमारा पीएच बेलेंस 6 से 8 तक उपर नीचे आता जाता है , बॉडी इसे बेलेंस को बेलेंस करने में लगी रहती है , हमारी लार और यूरिन का पीएच 6 से 7 होना चाहिये जबकी पूरे शरीर का पीएच 7 से उपर I
शरीर एसीडिक एनवॉयरमेंट को हटाने में लगा रहता है और हम इसे दिन भर न्यौता देते हैं, हमारा खानपान और विचार 80 फीसदी एसीडिक होते हैं , और 20 प्रतिशत एल्कलाईन, ऐसे में हैल्दी माहौल मेंटेन करने में बॉडी बुरी तरह पस्त पड़ जाती है , यही थकान और कमजोरी की तात्कालिक वजह होती है आगे चलकर ये सिच्वेशन बीमीरियों में कंवर्ट हो जाती है .
आपकी लाईफ स्टाईल , आपके खाने की च्वाईसेस आपके पीएच लैबल को पूरी तरह बेलेंस कर सकती है , बॉडी में एसीडिटी के कई कारण होते हैं , स्ट्रेस , दवायें , केमिकल्स , पेस्टीसाईडस , मांसाहार , प्रोसेस्ड फूडस , शकर और दूध से बने पदार्थ और अनाज पीएच लेबल को काफी कम कर देते हैं I
बस अपने भोजन को 80 फीसदी क्षारिय और विचारों को 80 फीसदी सात्विक कर दीजिये फिर देखिये कमाल कैंसे आपका ही शरीर आपका दोस्त बन जाता है .
अपने शरीर के पीएच को क्षारिय करने के लिए आपको एल्कलाईन डाईट अपनाना होगा
जितनी भी हरी पत्तेदार सब्जियां हैं जड़ वाली साग भाजियां हैं सब क्षारिय प्रकृति की होती हैं
नीम्बू, संतरा, मौसमी और अन्य मौसमी फल जैसे सेब,नाशपाती,तरबूज,अनानास, कीवी,खुबानी सब क्षारिय होते हैं नीबू संतरा भले ही खटटे हों लेकिन इनका असर एल्कलाईन होता है
बादाम, खजूर, किशमिस,अंजीर
रिवर्स ओसमोसिस फ़िल्टर सिस्टम से मिला पानी अम्लीय होता है, और बोतलबंद पानी से भी परहेज करना चाहिए, नल के पानी को उबालकर ठंडा कर लें और इसको घड़े में डालकर पीना चाहिए. घड़े का पानी एल्कलाइन का बेहतर सोर्स है., पानी में नीम्बू या बेकिंग सोडा मिलाने क्षारीय प्रभाव बढ़ाया जा सकता रहै , हर्बल टी, ग्रीन टी, समुंदरी नमक भी छारिय प्रकृति के होते हैं
खाने में एल्कलाईन डाईट 80% और अम्लीय भोजन 20 % होना चाहिए
खाने को चबाकर खायें , काने पर क्षारीय खनिज नष्ट हो जाते है इसलिए बिना पकाए ही या स्टीम से कम पकाई सब्जिया ही उपयोग में ले , पानी खूब पियें
एसीडिक भोजन
डिब्बाबंद,मीठे पदार्थ , अनाज , चाय , काफी , अल्कोहल,पास्ता, ब्रेड, चावल, कोक ,मीट,अंडा, डेयरी उत्पाद, दाले, मूंगफली, पिस्ता, काजू, सिंथेटिक मिठास युक्त उत्पाद ,दवाईयों का अधिक प्रयोग जैसे एस्प्रिन और एंटीबायोटिक,खासबात ये है कि जिस दूध को हम सेहत के लिए बेहतर मानते हैं वो दूध एसीडिक है और किसी भी रूप में सेहत के लिए अच्छा नही माना गया
एल्कलाइन डाइट के फायदे –
अच्छा स्वास्थ्य , फिटनेस , मजबूत हडडी , एंटी ऐजिंग , बीमारियों से मुक्ती , मजबूत प्रतिरोधक क्षमता , बेहतर पाचन तंत्र , हाई वायब्रेशनल फ्रीक्वेंसी
